24 अप्रैल 2014

केपीएस ने मनाई स्थापना दिवस की 8वीं वर्षगाँठ: बनाई शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट पहचान

|मुरारी कुमार सिंह|24 अप्रैल 2014|
मधेपुरा जिला मुख्यालय स्थित किरण पब्लिक स्कूल ने बुधवार को अपने स्थापना की आठवीं वर्षगाँठ मनाई. मौके पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की अध्यक्षा श्रीमती किरण प्रकाश ने की. केपीएस के प्रबंध निदेशक अमन प्रकाश ने विद्यालय परिवार एवं उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि अपने स्थापना काल से ही हमारा विद्यालय मधेपुरा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देता रहा है. शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालय ने सिर्फ मधेपुरा में ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में अपना नाम फैलाया है. विद्यालय को अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था एवं सीबीएसई नई दिल्ली द्वारा भी मान्यता प्रदान की गई है जो इस क्षेत्र के लिए अत्यंत ही गौरव की बात है.
      स्थापना दिवस की वर्षगाँठ पर विद्यालय के संस्थापक स्व० जय प्रकाश यादव को विद्यालय परिवार ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी. उप-प्राचार्य किशोर कुमार ने कहा कि स्व० जय प्रकाश बाबू के अधूरे सपने को पूरा करना हमसब का दायित्व है. मौके पर वर्ग एक से छ: तक की छात्र-छात्राओं के बीच विभिन्न विषयों पर वाद-विवाद एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया.  
        एक नई परंपरा की शुरुआत करते विद्यालय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को चांदी का सिक्का देकर प्रोत्साहित किया गया. इसमें पहली विजेता डा० मनोज कुमार की पुत्री जिया राज घोषित की गई जिसे विद्यालय की अध्यक्षा के हाथो सिल्वर क्वाइन से सम्मानित किया गया. मौके पर ही ओलंपियाड एवं पूर्व में आयोजित भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया.
      मौके पर विद्यालय के सभी शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित थे.

23 अप्रैल 2014

‘शरद यादव ठगी में नटवरलाल को भी पार कर गए, इनके समय में मधेपुरा में कुछ भी विकास नहीं, शरद और नीतीश से बड़ा अवसरवादी धरती पर नहीं होगा’: पप्पू यादव: मधेपुरा चुनाव डायरी (61)

|मुरारी कुमार सिंह|23 अप्रैल 2014|
दिन भर मुरलीगंज के कई गांवों में जनसंपर्क अभियान के दौरान लोगों से मिलने के बाद आज देर शाम मधेपुरा जिला मुख्यालय में मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र से राजद प्रत्याशी राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा कि किस विकास की बात कर रहे हैं शरद यादव. शरद के समय में कोशी और मधेपुरा की धरती पर एक भी विकास नहीं हुआ. फैक्ट्री से लेकर शिक्षा तक इनके समय में बदहाल रहा. जिले में गरीबी, भ्रष्टाचार और दलाली इनके समय में सबसे अधिक रहा.
      पप्पू यादव ने कहा कि शरद यादव और नीतीश कुमार से बड़ा अपरचुनिस्ट इस धरती पर नहीं होगा. बिहार के कई नेताओं का नाम गिनाते श्री यादव ने कहा कि नीतीश ने समय पर उनका उपयोग किया और काम निकल जाने पर उनके खिलाफ लगे रहे. नीतीश बार-बार कहते हैं लालटेन युग. मैं पूछता हूँ कि लालटेन युग नहीं तो क्या नौकरशाह का युग, जो आप बना कर छोड़े हैं.
      पूर्व सांसद आनंद मोहन की माँ से शरद यादव के मिलने की बात पर पप्पू यादव ने कहा कि इन्हीं लोगों ने आनंद मोहन को बर्बाद किया. शरद यादव के पहले चुनाव में मधेपुरा का माहौल बिगाड़ा था जब आनंद मोहन यहाँ से खड़े हुए थे. आज ये किस मुंह से उनके घर गए.
      राजद प्रत्याशी ने कहा कि उन्होंने डीएम की पत्नी के एलआईसी खाते की जांच की मांग की है कि मधेपुरा के कितने लोगों के पैसे उनके खाते में गए हैं. डीएम पर फिर से आरोप लगाते हुए पप्पू यादव ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए इन्हें मधेपुरा से हटाया जाय.

शरद ने कहा, ‘कोशी का इलाका है और बहती नदी में कमल नहीं खिलते और लालू ने लालटेन लेकर बुलडोजर को भेज दिया है’: मधेपुरा चुनाव डायरी (60)

|पुरैनी से अख्तर वसीम/ चौसा से आरिफ आलम|23 अप्रैल 2014|
मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र से जदयू के प्रत्याशी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी ताबड़तोड़ जनसंपर्क अभियान में जुड़े हुए हैं. आज जिले के कई जगहों पर शरद यादव ने जनसभा को संबोधित किया. पुरैनी प्रखंड मुख्यालय के मध्य विद्यालय पुरैनी के मैदान में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए शरद यादव ने कहा कि वे काम के आधार पर वोट मांगने आये हैं. सड़क, पुल, बिजली आदि सभी क्षेत्रों में प्रगति हुई है.
      पुरैनी में भाजपा पर निशाना साधते हुए जदयू प्रत्याशी ने कहा कि ये कोशी का इलाका है और कोशी बहती नदी है. बहती नदी में कमल नहीं खिला करते. कमल खिलने के लिए तालाब की जरूरत होती है और तालाब में कीचड़ की. शरद यादव ने लोगों को आगाह किया कि यदि बीजेपी को वोट दिया तो पूरे देश में कीचड़ फ़ैल जाएगा.
      दूसरी तरफ राजद प्रत्याशी पर कटाक्ष करते हुए शरद यादव ने भाषण में कहा कि लालू जी ने हमें हराने के लिए लालटेन लेकर बुलडोजर को भेजा है. मौके पर बिहार सरकार के मंत्री नरेंद्र नारायण यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष हाजी अब्दुल सत्तार, पुरैनी प्रखंड प्रमुख जय प्रकाश सिंह, सुजीत मेहता  आदि ने भी जनसभा को संबोधित किया.
      उधर चौसा के लौआ लगान तथा पैना में आयोजित सभा में शरद यादव ने लोगों को विकास के नाम पार्ट वोट डालने को कहा. उन्होंने कहा कि केन्द्र में ना तो यूपीए की सरकार बनेगी और न ही एनडीए की ही. केन्द्र में तीसरे मोर्चे की सरकार बनना तय है. मौके पर मंत्री नरेंद्र नारायण यादव ने भी लोगों को संबोधित किया और शरद यादव को विकास पुरुष बताया.

‘मेरा रिकॉर्ड है जिसके साथ रहा हूँ, केन्द्र में उसकी ही सरकार बनी है’: रामविलास पासवान: मधेपुरा चुनाव डायरी (59)

|आरिफ आलम|23 अप्रैल 2014|
लोजपा नेता रामविलास पासवान का दावा है कि लोकसभा चुनाव के समय वे जिस गठबंधन में रहते हैं, सरकार उसकी ही बनती है. ये उनका एक रिकॉर्ड है. इस बार वे भाजपा के साथ है और 16 मई के बाद केन्द्र में भाजपा की सरकार बननी तय है.
      रामविलास पासवान आज मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी विजय कुशवाहा के समर्थन में प्रचार कर रहे थे. मधेपुरा जिला के चौसा प्रखंड मुख्यालय के जनता हाई स्कूल में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए श्री पासवान ने कहा कि विपक्षी पार्टियां कब के गोधरा कांड को उजागर कर रहे हैं तो किसके शासन में इस तरह की घटना की घटना नहीं हुई है. मेरा ये रिकॉर्ड है कि जिस पार्टी के साथ जुड़ा हूँ, केन्द्र में उसकी ही सरकार बनी है.
            मौके पर सभा को भाजपा प्रत्याशी विजय कुशवाहा, रेणु कुशवाहा, भाजपा नेता नन्द किशोर यादव तथा स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी संबोधित किया और भाजपा को जिताने का आह्वान किया.
रामविलास पासवान की कुछ पंक्तियों जैसे मैं उस घर में दीया जलाना चाहता हूँ जिस घर में सदियों से अँधेरा है आदि पर सभा में मौजूद कुछ लोगों का कहना था कि राम विलास जी एक ही भाषण को दुहराते रहते हैं.

22 अप्रैल 2014

शरद यादव ने मधेपुरा का नाम रौशन किया, बीजेपी वाले प्रत्याशी की खासियत क्या है और ये लालटेन लेकर कौन आ गए हैं?: मुख्यमंत्री: मधेपुरा चुनाव डायरी (58)

|कुमार शंकर सुमन|22 अप्रैल 2014|
मधेपुरा से उत्तर बिहार के कई इलाके में चुनावी सभा कर रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज में चुनावी सभा को संबोधित किया. उअदाकिशुनगंज के उच्च विद्यालय के मैदान में आयोजित सभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि शरद यादव को उत्कृष्ट सांसद का पुरस्कार मिला है. शरद ने मधेपुरा का नाम रौशन किया. देश के गिने चुने प्रतिष्ठित नेता में उनकी गिनती होती है. वे आज जिस ऊंचाई पर हैं, कि यदि मधेपुरा के लोग बाहर जाते हैं तो लोग पूछते हैं कि आप शरद जी के इलाके से आये हैं? उन्होंने मधेपुरा के नाम को कभी नीचा नहीं किया.
      बीजेपी प्रत्याशी पर हमला बोलते हुए नीतीश ने कहा कि ये किस आदमी को बीजेपी ने चुना है. उसकी क्या खासियत है. रेणु कुशवाहा पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि एमपी का चुनाव हार गई थी, हमने टिकट दिया था. उसे हम बहन मानते थे, एक नाम दिया, पहचान दिया. आज उसी का इस्तेमाल पार्टी और शरद जी के खिलाफ. पर उसने सरकार से इस्तीफ़ा दे दिया. कोई मर्यादा नहीं. राजनीति को इतना गिरने मत दीजिए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीसरी तरफ लालटेन लेकर कौन आ गए हैं. हमको कुछ नहीं कहना है, आप सोच लीजिए. हमको आरजेडी वाले लोग ने कहा कि ये यहाँ रुके हुए है. इनका जांच होना चाहिए. हमने कहा सुबह से शाम तक हैलीकॉप्टर की जांच कर लो. खाना का पैकेट ले जाते हैं, जांच कर लो और भूख लगी है तो खा लो. थर्मस में पानी रहता है, तुम्ही पी लो. क्या मर्यादा रह गई है.
दूसरी तरफ शरद यादव आपकी मर्यादा का ध्यान रखते हैं. और इस देश में ये जो काम करते हैं दूसरे देश में भी इसकी चर्चा होती है. कॉंग्रेस के विरोध में सभी पार्टी को संगठित करने का काम कोई और नहीं बल्कि शरद यादव ने किया.
हमारे प्रत्याशी से न किसी की कोई तुलना है और न ही हमारे काम से. हम जात और धर्म पर नहीं बल्कि अपने काम के आधार पर वोट मांगता हूँ. फैसला आपको करना है.
मुख्यमंत्री को सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें.

‘हमारा किसी से कंटेस्ट नहीं है, न्यूट्रल लोग कहते हैं कि मैं दो लाख से अधिक वोट से जीतूंगा’: विजय कुशवाहा: मधेपुरा चुनाव डायरी (57)

|मुरारी कुमार सिंह|22 अप्रैल 2014|
मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा उमीदवार विजय कुमार सिंह कुशवाहा का कहना है कि हमको किसी से कंटेस्ट नहीं है. हमें सभी धर्म और जाति का समर्थन प्राप्त है. यहाँ तक कि 10% यादव भी हमें कहते हैं कि मधेपुरा अशांत हो जाएगा, हम देखे हुए हैं. इसलिए हम भी आपको ही वोट देंगे. न्यूट्रल लोग कहते हैं कि हम दो लाख से अधिक वोट से जीतने जा रहे हैं. यहाँ तक कि मुसलमानों का भी वोट हमें मिलेगा. क्षेत्र में जाते हैं तो लोग समस्या सुनाते हैं.
      श्री कुशवाहा कहते हैं कि सारे लोग कहते हैं कि शरद जी का सारा बैंक वोट हमारे तरफ आ गया. शरद यादव तीन नंबर पर चले गए हैं. इतना तीन नंबर जिसका जवाब नहीं है. कंटेस्ट यदि है भी तो पप्पू यादव से है. अब लोगों को तय करना है कि वे किसे चुनते हैं.
      देखा जाय तो सारे प्रत्याशी कई खास वर्ग के वोटरों को अपनी ओर सोचकर कैलकुलेशन कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि इस महासमर में वे जीत की ओर बढ़ रहे हैं, पर वोटर हैं कि जो उम्मीदवार उनके पास जा रहे हैं वे उसी को आश्वासन दे देते हैं, भले ही वे मन में कुछ और रखे हुए हों. अब किनके दावों में कितना दम है ये तो 16 मई को ही साफ़ होगा. 
वीडियो  में सुनें विजय कुशवाहा को, यहाँ क्लिक करें.

मुद्दे पर ना बात पर, बटन दबेगा जात पर !: सुपौल लोकसभा पर एक रिपोर्ट

|सुपौल से पंकज भारतीय|22 अप्रैल 2014|
कोसी की विनाशलीला और रोजगार के लिए पलायन का दशकों से दर्द लिए सुपौल लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने लोकतंत्र के महापर्व 2014 का मुस्कुरा कर स्वागत किया. चुनाव प्रचार के दौरान मुद्दे और इरादे की खूब चर्चा हुई और हर दल और प्रत्याशी ने अपनी कमीज दूसरे से सफ़ेद बतलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. आम मतदाता खामोश रहे क्योंकि उन्हें बहरूपिये, कोरे वायदे और जन्नत की हकीकत का पता है. ज्यों-ज्यों मतदान की तारीख नजदीक आते गए, वाडे और मुद्दे गौण होते गए. चुनाव से ठीक पहले स्पष्ट हो गया कि पूर्व की भांति चुनाव परिणाम जातीय समीकरण और मतों का ध्रुवीकरण तय करेगा.
      सुपौल लोकसभा नए परिसीमन के बाद वर्ष 2009 में अस्तित्व में आया. इससे पूर्व यह सहरसा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था. इसमें कुल छ: विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं और कुल 14.98 लाख मतदाता हैं. सुपौल जिला का सुपौल, पिपरा, त्रिवेणीगंज, छातापुर और निर्मली तथा मधेपुरा जिला का सिंहेश्वर विधान सभा क्षेत्र इस लोकसभा का हिस्सा हैं. सभी छ: विधानसभा सीट पर जनता दल यू का कब्ज़ा है. वर्ष 2009 के चुनाव में जदयू के विश्वमोहन कुमार ने भाजपा-जदयू के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज किया था और निकटतम प्रतिद्वंदी कॉंग्रेस की रंजीत रंजन रही थी. राजद-लोजपा के उम्मीदवार सूर्य नारायण यादव तीसरे स्थान पर रहे थे. इस बार जदयू ने विश्वमोहन कुमार को बेटिकट कर दिया तो वे भाजपा में शामिल हो गए. विश्वमोहन कुमार की पत्नी सुजाता देवी पिपरा विधानसभा का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे पार्टी ने अब निलंबित कर दिया है.
      फिलवक्त चुनावी मैदान में भाजपा के कामेश्वर चौपाल, कांग्रेस की रंजीत रंजन और जदयू के दिलेश्वर कामत के बीच त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है. कामेश्वर चौपाल राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े चर्चित व्यक्ति रहे हैं और इसी जिले के निवासी हैं. कांग्रेस की रंजीत रंजन और पूर्व में जब सुपौल सहरसा लोकसभा का हिस्सा था क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व कर चुकी है और बाहुबली पप्पू यादव की पत्नी है. दिलेश्वर कामत पूर्व में विधायक रह चुके हैं और इसी जिले के रहने वाले हैं. इसके अलावा आम आदमी पार्टी के परमेश्वर झा और बहुजन मुक्ति पार्टी के देव नारायण यादव, बसपा के अमन कुमार समाजसेवी और भाकपा-माले के जय नारायण यादव समेत कुल 12 प्रत्याशी चुनावी अखाड़े में मौजूद हैं. कांग्रेस के लिए यह वापसी का मौका है तो जदयू को अपना गढ़ बचाना है और भाजपा स्वतंत्र अस्तित्व की निर्णायक लड़ाई लड़ रही हैं.
      जातीय समीकरण की बता करें तो मोटे अनुमान के तौर पर यहाँ सर्वाधिक संख्यां यादव की है. यादवों के बाद सबसे अधिक संख्यां केवट (मंडल) की है. इसके अलावा दलित, महादलित, वैश्य एवं अति पिछडों की संख्यां अच्छी खासी है. सवर्णों की संख्यां लगभग एक लाख बताई जाती है. कॉंग्रेस की रंजीत रंजन को माय समीकरण पर भरोसा है और सवर्ण एवं अन्य पिछड़ी जातियों पर भी वह दावा पेश करती है. वहीँ भाजपा के कामेश्वर चौपाल को वैश्य, अति पिछड़ा एवं सवर्णों से उम्मीद के साथ-साथ नरेंद्र मोदी की लहर पर भरोसा है. जदयू के दिलेश्वर कामत को केवटों के साथ-साथ सवर्णों और महादलितों से उम्मीद है और उन्हें नीतिश कुमार के कामकाज के आधार पर भी जनसमर्थन की आशा है. जातीय समीकरण से स्पष्ट है कि एक ही जाति पर कई प्रत्याशियों की नजर है. खासकर जदयू और भाजपा का एक ही वोट बैंक पर नजर है और यह चुनाव जातीय वोट बैंक का विभाजन भी तय करेगा.
      तमाम हलचल के बाद भी मतदाता खामोश हैं और अपना पत्ता खोलने से परहेज कर रहे हैं. वहीँ सभी प्रमुख दलीय प्रत्याशी भीतरघात के दौर से गुजर रहे हैं. भीतरघात की स्थिति सर्वाधिक कांग्रेस, राजद और भाजपा में तो कमोबेश जदयू और आप में भी है. मतदाताओं की चुप्पी समझ से परे है, लेकिन इशारों को अगर अभिव्यक्ति समझा जाए तो स्पष्ट है कि कोशी के कछार पर जातीय समीकरण ही परिणाम तय करेगा क्योंकि अबतक यहाँ वोट और बेटी अपनी जाति को ही देने की परंपरा रही है. एक खास बात यह है कि अंतिम समय में वोटों के ध्रुवीकरण से भी इनकार नहीं किया जा सकता. अगर ऐसा हुआ तो परिणाम में बड़ा उलटफेर संभव है जो चौंकाने वाला भी हो सकता है.    

यदि फिर डकैतों ने उठा लिए हथियार!: सपने दिखाकर सरकार ने कराया आत्मसमर्पण, पर दिया धोखा

|आर. एन. यादव|22 अप्रैल 2014|
घोड़ों की टाप से थर्राता इलाका. लोगों की रातें करवटें बदलते कटती थी कि न जाने कब दर्जनों की संख्यां में आग्नेयास्त्र के साथ डकैत उनके घर पर धावा बोल दे और जिंदगी भर कि कमाई साथ लेकर चला जाय. एक समय था जब मधेपुरा के इलाके में भी डकैतों का बोलबाला था और महिलाओं की आबरू तक उन्हीं की दया पर बची रहती थी. रौब जमाने वाली पुलिस घटनास्थल पर तब पहुँचती थी जब डकैत वहाँ से आराम से चले जाते थे. हालात बदले और डकैतों ने भी सूबे के विकास में अपना योगदान करना चाहा. सरकार ने इन्हें आत्मसमर्पण करने पर समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का वादा किया. पर क्या हुआ उसके बाद. क्या नेताओं ने अपनी जात दिखा दी? क्या डकैत पर भी भारी पड़ गए नेता जी ? जी हाँ, कुछ ऐसा ही हुआ है मधेपुरा के डकैतों के साथ.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष वर्ष 2005 में आत्म समर्पण कर समाज के मुख्य धारा में जुड़ने की चाहत रखे कुख्यात अपराधी आज दाने-दाने को है मुंहताज. यही नहीं स्थानीय पुलिस डरा धमका कर वसूली करने में लगे हैं. पैसे नही देने पर जेल भेजने की धमकी देते हैं पुलिस वाले. सरकार द्वारा की गई घोषणा हवा-हवाई साबित हुई. तो किये गये वायदे साबित हुए ढाक के तीन पात. अब तक नही मिला जीवन यापन का कोई सहारा. उलटे पुलिस इन्हें परेशान कर रही है और पुलिस के डर से ये आत्म समर्पणकारी दिन रात दियारा क्षेत्र के जंगल झाड़ में जीवन बिताने को मजबूर हैं.
मधेपुरा जिले के कुमारखंड प्रखंड के टेंगराहा गांव के जनार्दन सरदार, परमानन्द सरदार, सोनाय सरदार जैसे 5 दर्जन कुख्यात डकैत और अपराधी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष 2005 ई0 में सिंहेश्वर के मवेशी हाट में आयोजित सभा में आत्मसमर्पण किये और इन्होने समाज के मुख्य धारा में जुड़ने का निर्णय लिया था. पर सरकार द्वारा कराया गया आत्मसमर्पण झांसा निकला. सरकार के द्वारा नही लिए गये मुकदमें वापस.
आइये देखते हैं कि किन आश्वासनों पर डकैतों को छला गया. मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा किया गया था कि सभी आत्मसमर्पणकारियों को जीवन यापन के लिए उपजाऊ जमीन दिया जाएगा. इंदिरा आवास तथा बैंक से ऋण मिलेगा, बच्चों को मुफ्त में शिक्षा के लिए मिड्ल व हाई स्कूल दिया जाएगा. सभी मुकदमें भी वापस ले लिए जाएंगे तथा इस गांव में स्थाई पुलिस चौकी भी खोला जाएगा.
लेकिन आज तक इन आत्मसर्पणकारियों को सरकार द्वारा कुछ भी नही दिया गया. एक हाई स्कूल ग्रामीणों के सहयोग से तो खोला गया पर आज तक स्कूल का सरकारीकरण सरकार द्वारा नही किया गया जिसके कारण स्कूल में कार्यरत शिक्षक व कर्मी दाने-दाने को मुंहताज हैं क्योंकि इन्हें वेतन नही मिलते हैं तो बच्चों को क्या शिक्षा दे पाएंगे. आत्मसर्पणकारी के बच्चों को रहने के लिए करोडों की लागत से विशाल छात्रावास भी बनाया गया है जो निरर्थक साबित हो रहा है क्योकि यहां के स्कूल में पठन पाठन का कार्य ही नही होता है तो बच्चें कहां से आएंगे. इस गांव में पुलिस ओपी तो बनकर कई साल पूर्व तैयार हो गया पर आज तक चालू नही हो सका है.
इन सारी समस्याओं को झेल रहे आत्मसमर्पणकारी को स्थानीय भतनी थाना के थानेदार बंधी बंधाई रकम के लिए तंग तबाह करते हैं और नही देने पर जेल भेजने की धमकी देते जिसके कारण ये आत्मसर्मणकारी मारे-मारे दियारा के जंगल व झाडी में पुलिस के डर से छिप-छिप कर दिन काटते हैं. अब ये नदी से मछली मार कर पेट की आग बुझाने को मजबूर हैं.
सरकार की वादाखिलाफी और पुलिस की करतूत से आहत आत्मसमर्पणकारी आगामी लोक सभा चुनाव में वोट नही डालने का निर्णय ले रहे हैं.
स्थानीय जदयू विधायक रमेश ऋषिदेव सीधे कह डालते हैं कि सरकार द्वारा बहुत कुछ दिया गया है. वहीँ मधेपुरा एसपी आनंद कुमार सिंह ने कहा कि अगर जानबुझकर थानेदार तंग तबाह करता है तो इसकी जांच कर थानेदार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
पर अगर पुलिस के द्वारा इसी तरह इन आत्मसमर्पणकारी  को प्रताड़ित करने का सिलसिला चलता रहा तो आजीज होकर ये आत्मसमर्पणकारी फिर से उठा सकते हैं हथियार और इलाके में फिर से गूँज सकती है गोलियों की आवाज. बेहतर है सरकार इन्हें वायदे के अनुसार मुख्य धारा में जोड़ ले.

सिलिंडर हादसे में तीन घायलों की स्थिति हुई नाजुक: पटना अपोलो बर्न्स हॉस्पीटल में भर्ती

|मुरारी कुमार सिंह|22 अप्रैल 2014|
बीती शाम जिला मुख्यालय में दो-दो गैस सिलिंडर फटने के मामले में घायलों में से तीन की स्थिति अचानक बिगड जाने से तीनों को पटना के अपोलो बर्न्स हॉस्पीटल में भर्ती कराना पड़ गया है.
      बता दें कि कल शाम मधेपुरा के रेलवे स्टेशन के सामने वाले वार्ड नं. 21 में सिलिंडर हादसे में एक ही परिवार के चार लोग जख्मी हो गए थे, जिनमें पिंटू साह की पत्नी नूतन कुमारी और बेटी निधि कुमारी के साथ एक छोटे बेटे आशु राज की स्थिति कुछ ही घंटे में ज्यादा बिगड़ जाने की वजह से इन्हें पटना ले जा गया है. सिलिंडर फटने से शरीर के कई हिस्से जल जाने के कारण इनका इलाज पटना के अपोलो बर्न्स हॉस्पीटल में शुरू किया गया है जहाँ अबतक इनकी स्थिति गंभीर बताई गई है.

21 अप्रैल 2014

मधेपुरा शहर में भयानक हादसा: दो सिलिंडर फटे, दो बच्ची समेत चार घायल

|मुरारी कुमार सिंह|21 अप्रैल 2014|
आज शाम शहर में हुए एक हादसे में चार लोग घायल हो गए. हादसा एक-एक कर दो गैस सिलिंडर सिलिंडर फटने की वजह से हुआ. घटना जिला मुख्यालय के वार्ड नं.21 में रेलवे स्टेशन के पास के पिंटू साह नाम के एक व्यक्ति के घर में हुआ. शाम करीब 6:30 बजे अचानक गैस सिलिंडर फटने से अफरातफरी मच गई और जबतक लोग कुछ समझ पाते दूसरा सिलिंडर भी फट गया. आवाज इतनी भयानक थी और आग की लपटें इतनी तेज थी कि आसपास के लोग घर में घुसकर घायलों को बचाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे.
      फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी सूचना के आधे घंटे के बाद पहुंची और फिर किसी तरह हालात पर काबू पाया गया. घर की लाखों की संपत्ति जहाँ जल कर बर्बाद हो गई वहीँ घर की दो महिला माँ-बेटी नूतन कुमारी और निधि कुमारी (18 वर्ष) के साथ दो बच्चे चेतना कुमारी (6 वर्ष) और आशु राज (5 वर्ष) भी बुरी तरह जख्मी हो गए. हालाँकि इलाज कर रहे सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि घायलों की जान खतरे से बाहर है.
      घटना के बारे में आसपास के लोगों का कहना था कि पिंटू साह गैस के अवैध रिफिलिंग का धंधा करता था और इसी दौरान लापरवाही से ये दुखद घटना घटी है.
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