अखिल भारतीय कवि सम्मलेन: ठहाकों से गूंजा ऑडिटोरियम

संवाददाता/26/11/2012
बीती रात मधेपुरा के लोगों के लिए एक यादगार रात बन रह गयी. देश के कोने-कोने से आये कवियों ने ऐसा शमां बाँधा कि दर्शक कार्यक्रम के अंत तक अपनी जगह से उठ नहीं पाए. बी.एन.मंडल ऑडिटोरियम की 25 नवंबर की रात शायद मधेपुरा के लोगों की पहली ऐसी रात थी जिसमे ठहाके रूकने का नाम नहीं ले रहा था. चाहे सिवान के सुनील तंग हों या भारत के प्रसिद्द कवि भूषण त्यागी, ग्वालियर के साजन ग्वालियरी या मंजर सुल्तानपुरी या फिर इलाहाबाद के अखिलेश द्विवेदी श्रोता हँसते-हँसते लोट-पोट हो गए. गाजीपुर की संज्ञा तिवारी के गीतों ने भी लोगों को झूमने पर मजबूर किया. वहीं मधेपुरा के एएसपी हिमांशु शंकर त्रिवेदी की कविता और दो-लाईना को भी बाहर से आये कवियों तथा मधेपुरा के दर्शकों ने खूब सराहा. स्थानीय कवि शंभू शरण भारतीय ने अपनी कविता के माध्यम से देश और समाज में चल रहे भ्रष्टाचार को दर्शाने का प्रयास किया.
            कार्यक्रम का उदघाटन जहाँ मधेपुरा के अपर जिला न्यायाधीश रामलखन यादव ने किया वहीं इसकी अध्यक्षता का भार देश के प्रसिद्द कवि भूषण त्यागी को सौंपा गया. सिवान के प्रसिद्द हास्य-व्यंग कवि सुनील तंग के मंच सञ्चालन का अंदाज भी जहाँ लोगों को गुदगुदाता रहा वहीँ इनकी कविता भी धारदार रही. मधेपुरा की धरती के लिए अभूतपूर्व रहे इस कार्यक्रम के संयोजक मौर्या कॉपरेटिव एग्रो इंडस्ट्री पुरैनी के निदेशक कुमार चंद्रशेखर थे वहीं कई न्यायाधीशों, पुलिस पदाधिकारियों आदि की उपस्थिति ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई.
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3 comments:

  1. मधेपुरा में कवि-सम्मेलन करा कर एक अच्छी परम्परा की शुरुआत करने के लिए आयोजक को कोटि-कोटि धन्यवाद !

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  2. एक साल की हंसी दर्शको ने एक दिन में हँस ली ! सुनील तंग ने हँसा-हँसा के जान ही निकाल दी ! इसे स्वस्थ कार्यक्रम होने चाहिए !

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  3. Madhepura me kavi sammelan ka ayojan iski pragati ka pratik hai.

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