30 अगस्त 2017

पुनीता सिंह की अद्भुत मिथिला पेंटिंग ने बढ़ाई मधेपुरा टाइम्स स्टूडियो की शोभा

देश की राजधानी नई दिल्ली में मिथिला पेंटिंग को लोकप्रिय बना रही पुनीता सिंह की एक अद्भुत पेंटिंग मधेपुरा टाइम्स स्टूडियो की शोभा बढ़ाने जा रही है.


दिल्ली में रह रही मधेपुरा की बेटी और सहरसा की बहू पुनीता सिंह की यह ख़ास पेंटिंग मधेपुरा टाइम्स के लिए ही बनाई गई है और इसमें मधेपुरा टाइम्स के संपादक के अनुरोध पर नए और अनोखे प्रयोग किये हैं. पेंटिंग का थीम भी इस सबसे पहले क्षेत्रीय पोर्टल के कार्य और उपलब्धियों के अनुसार ही तय कर मिथिला पेंटिंग को भी प्रयोग के नए दौर से गुजारने की कोशिश की गई है जो एक अत्यंत सराहनीय कदम माना सकता है.

दरअसल, 11 जून 2017 को मधेपुरा टाइम्स ने पुनीता सिंह की उपलब्धियों पर एक रिपोर्ट प्रकाशित करने के दौरान उनसे लिए गए इंटरव्यू में मिथिला पेंटिंग की बारीकियों को हमने समझना चाहा था. उन्होंने यह भी कहा था कि अपनी कोसी और मिथिला की संस्कृति के गौरवशाली विरासत को बचाने का प्रयास हर किसी को करना चाहिए और इसके लिए मिथिला और मधुबनी पेंटिंग एक सशक्त माध्यम हो सकता है. ऐसे में मधेपुरा टाइम्स के स्टूडियो में मिथिला पेंटिंग का होना एक गौरव का क्षण है.

क्या ख़ास है इस पेंटिंग में: दिल्ली से मधेपुरा टाइम्स को भेजे इस ख़ास पेंटिंग को बनाने में कई महीने लगे हैं और ये बेटी बचाओ के थीम पर आधारित है. विशाल आकार के इस पेंटिंग में गर्भ में कन्या, उसके लालन-पालन से लेकर बेटियों के कई सफलतम रूपों को भी दर्शाया गया है. एक वृक्ष के रूप में बेटियों के बढ़ने की अद्भुत कहानी इस अनोखी पेंटिंग में है, जहाँ घर के काम-काज से लेकर बेटियों को खिलाड़ी, डॉक्टर और देश की रक्षा में भी आगे दिखाया गया है. पेंटिंग के चारों कोने पर मधेपुरा टाइम्स का ‘लोगो’ भी मौजूद है. 

मिथिला पेंटिंग में कोसी की नाज बन चुकी पुनीता सिंह द्वारा  ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ थीम पर आधारित बनाई गई पेंटिंग को आज पत्रकार संजय परमार, आलोक सिंह व अन्य ने मधेपुरा टाइम्स को भेंट किया. दिल्ली से फोन पर बात करते पुनीता कहती है कि आज मुझे वहां न रहने का काफी अफ़सोस है क्योंकि मैं खुद से इसे आपको देना चाहती थी पर चूंकि अभी मधेपुरा और सहरसा आने में थोड़ा समय लग सकता था और मैं चाहती थी कि पेंटिंग सूबे की शान बन चुके मधेपुरा टाइम्स स्टूडियो की जल्द से जल्द शोभा बढ़ा सके, इसलिए मैंने इसे तैयार होते ही भिजवाना उचित समझा.

जाहिर सी बात है, इस अद्भुत पेंटिंग के लिए पुनीता प्रशंसा और सम्मान की हकदार हैं और मिथिला पेंटिंग के ट्रेनर के रूप में दिल्ली में भी इसे लोकप्रिय बना रही पुनीता की भावना उसे और मिथिला पेंटिंग को एक अलग पहचान दिलाने में हमेशा कारगर साबित होगी.

कौन हैं पुनीता सिंह और क्या है उनकी उपलब्धियां, जानने के लिए जरूर पढ़ें इस आर्टिकल को: “पुनीता सिंह: मधेपुरा की बेटी मिथिला पेंटिंग को देश की राजधानी में बना रही है लोकप्रिय
(Report: R.K. Singh)

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