इस अवसर पर केंद्रीय कार्य समिति सदस्य समीक्षा यदुवंशी ने कहा कि पीएम-उषा योजनान्तर्गत विश्वविद्यालय को 44 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं। लेकिन कुलपति की हठधर्मिता के कारण इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से देशविरोधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। इसमें मनोविज्ञान विभाग के द्वारा भारत विरोधी, चरमपंथी एवं कट्टरपंथी वक्ताओं को आमंत्रण दिया गया। इसमें बिना सरकार की अनुमति के बांग्लादेश, फिलिस्तीन, बहरीन, सऊदी अरब के वक्ताओं को आमंत्रण दिया गया। यह सब कुछ कुलपति की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में हुआ है, जिसकी खबर अखबार में प्रकाशित हुई है। इसके बावजूद कुलपति का यह कहना कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है, समझ से परे हैं। यह इस बात को दर्शाता है कि कुलपति झूठे हैं या उनका प्रशासनिक नियंत्रण समाप्त हो गया है।
राज्य विश्वविद्यालय कार्य प्रमुख सौरव यादव ने कहा कि कुलपति के द्वारा कट्टरपंथी चरमपंथी और देश विरोधी मानसिकता वालों को शुरू से इस विश्वविद्यालय में प्रश्रय दिया जा रहा है। जब कभी भी हम ऐसी गतिविधियों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हैं तो कुलपति महोदय निलंबन करके हमारे भविष्य को बर्बाद करने की धमकी देते आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कुलपति ने पीएम-उषा के पूरे कार्यक्रम को देशविरोधी मानसिकता वाले लोगों के हवाले कर दिया है। इसकी कोर कमेटी के प्रायः सभी सदस्यो की पृष्ठभूमि वैसी ही हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में ऐसे प्रोफेसर को ही विश्वविद्यालय के निर्णायक पदों पर बिठाया गया है। इसमें राजभवन द्वारा जारी एक व्यक्ति एक पद के निर्देश की भी अवहेलना हो रही है। विभागाध्यक्ष फूल टाइम पद होने के बावजूद कई विभागाध्यक्ष विश्वविद्यालय पदाधिकारी बने हुए हैं। मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष को अध्यक्ष छात्र कल्याण, इतिहास विभागाध्यक्ष को कुलानुशासक, रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष को आईक्यूएसी निदेशक बनाया गया है। सभी विभागाध्यक्षों को विश्वविद्यालय के पदाधिकारी के पद से हटाया जाए। प्रांत एसएफएस सह संयोजक आमोद आनंद ने कहा प्रो. सी. पी. सिंह शिक्षाशास्त्र तथा पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के भी इंचार्ज हैं। प्रो. एम. आई. रहमान प्लेग्रिज्म डिटेक्शन सेंटर के निदेशक के रूप में विगत 6 वर्षों से एक ही पद पर काबिज हैं। विश्वविद्यालय के शोध से संबंधित सभी कार्यों और महत्वपूर्ण निर्णय उनके ही जिम्मे है। इन्हें तत्काल पद से हटाया जाए। कार्यक्रम को नए सिरे से चालू किया जाए।
जिला संयोजक नवनीत सम्राट ने कहा कि वर्तमान कुलपति पूरी तरह से तानाशाही रवैया रखते हैं। सभी कार्य स्वयं करते हैं। लेकिन जब फंसते हैं, तो कहते हैं कि उनको कुछ पता नहीं है। पीएम-उषा की कोर कमेटी का गठन कुलपति की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ली गई है। इसमें कुलपति ने अपने चाटुकारों को रखा है। कोर कमेटी में किसी भी संकायाध्यक्ष एवं कुलसचिव को नहीं रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। वर्तमान कोर कमेटी को तत्काल प्रभाव से भंग कर न ई कोर कमेटी गठित की जानी चाहिए। सेमिनार का टॉपिक जिस विषय से संबंधित है, उस विभाग को आयोजन की जिम्मेदारी दी जाए। मनोविज्ञान विषय में भारत विरोधियों को आमंत्रण देने और इंडियन फिलॉस्फी एंड मेटाफिजिक्स का आयोजन उर्दू विषय को देने वाले पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अन्यथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अनवरत आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। इस मौके पर राजू सनातन, अंशु राज, अजय कुमार, रवि कुमार, विकास कुमार आदि उपस्थित रहे।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
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February 05, 2026
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