07 मई 2017

मधेपुरा जिला मुख्यालय में कांग्रेस ऑफिस विवाद ने फिर पकड़ा जोर ,धारा 144 लागू

1926 में दान दाता श्यामापदो घोष द्वारा कांग्रेस कार्यालय के लिए दान में दी गई भूमि और भवन अब विवादों में आ गई है।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष सत्येंद्र नारायण सिंह ने रविवार को प्रेस वार्ता कर कहा है कि दान में कांग्रेस पार्टी को दी गई भूमि और भवन पर अवैध कब्जा हटाने के लिए हम लोगों ने कानूनी सहारा लिया है और प्रशासन अगर शीघ्र हस्तक्षेप कर हमे न्याय नहीं देती है तो हमलोग विवश होकर आंदोलन क सहारा लेंगे ।

दरअसल 1926 में स्वतंत्रता आंदोलन का परचम कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में लड़ा जा रहा था ।अंग्रेज एस डी ओ के आवास के बगल में स्थित इस भूमि पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के उद्देश्य से ही इस भूमि के स्वामी श्यामापदो घोष ने यह भूमि कांग्रेस को दान में दे दिया था।स्वतंत्रता के बाद इस भूमि पर कांग्रेस कार्यालय चलने लगा । लेकिन जब अर्स कांग्रेस बना तो इस भूमि पर उनका कब्जा हो गया और अर्स कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष ने बिना किसी अधिकार के इस भवन और भूमि को एक निर्णय लेकर शिव नंदन सेवाश्रम को दान स्वरूप देने का निर्णय ले लिया।तभी से इस स्थान पर कांग्रेस का कब्जा नहीं रहा।

      लेकिन अब इसके लिए दानदाता के वंशज इंद्रनील घोष और कांग्रेस पार्टी के वरीय नेता डाक्टर अरुण कुमार और जिलाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सिंह यादव ने झंडा उठा लिया है।श्री घोष का कहना है कि उनके पर दादा ने मात्र एक कट्टा तेरह धुर भूमि पर स्थित देशबन्धु चितरंजन भवन कांग्रेस पार्टी को दान में दिया था।लेकिन कांग्रेस के बदले आज यह व्यक्तिगत संपत्ति हो चुकी है और मेरे कुल छह कट्टा भूमि पर कब्जा जमाने की कोशिश की जा रही है।दूसरी ओर कांग्रेस नेता अरुण कुमार कहते हैं कि आज भी यह भवन हाल सर्वे और नगरपालिका होल्डिंग में कांग्रेस पार्टी और कार्यालय के नाम से है।हमारे पास लगान रसीद और नगरपालिका रसीद भी है।फिर हम कांग्रेस पार्टी इसे छोड़ कैसे  देंगे ।

थानाध्यक्ष मनीष कुमार बताते हैं कि दोनों पक्षों से जानकारी लेकर जब मसला नहीं सुलझा तो धारा 144 लगा कर एक पक्ष के अरुण कुमार और इंद्रनील घोष तथा दूसरे पक्ष के सत्यजीत यादव को यहां किसी भी निर्माण से निरुद्ध किया जा चुका है।अब न्यायालय से फैसला के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

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