12 नवंबर 2016

मधेपुरा में देर तक लाइन में खड़ी पांच महिलायें बेहोश

एक तरफ नए नोट के साथ सेल्फी लेकर ‘ख़ास’ लोग ‘मोगेम्बो’ हो रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकार के ब्लैक मनी पर सर्जिकल स्ट्राइक की चोट बहुत से ‘आम’ लोगों की जिन्दगी पर भारी पड़ रही है.
    उधर मध्य प्रदेश में जहाँ घंटों लाइन में लगने के बाद एक रिटायर्ड कर्मी की हार्ट अटैक से मौत की खबर है वहीँ मधेपुरा में भी तबाही का मंजर सा दिखने लगा है. बैंकों में रूपये बदलवाने, रूपये जमा करने तथा रूपये निकालने वालों की बेकाबू भीड़ साफ़ कह रही है कि ‘बहुत कठिन है राह पनघट की’. एक बात साफ़ तौर से समझ लीजिये कि इस भीड़ में करोड़ों से खेलने वाला कोई धन्ना सेठ खड़ा नहीं हो सकता. रूपये बदलवाने वाले ये वो लोग हैं जिनकी औकात चार हजार रूपये से प्रभावित हो जाती है.
    मधेपुरा जिले के सारे बैंकों में जहाँ भीड़ का आलम सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है वहीँ जिले के आलमनगर बाजार स्थित स्टेट बैंक की एडीबी शाखा में आज चार घंटे लाइन में रहने के बाद महिलायें बेहोश होकर गिरने लगी. प्रखंड के गंगापुर लुटना टोला की उर्मिला देवी, बड़गाँव की सुमित्रा देवी, आलमनगर पूर्वी पंचायत के अठ्गामा बासा की गीता देवी समेत कुल पांच महिलाओं के आज बेहोश होकर गिरने की खबर है. बैंककर्मी और सुरक्षा गार्ड इन्हें उठाकर बगल के कमरे के ले जाते रहे और होश में लाकर घर भेजते रहे. पीड़ितों का कहना था कि सरकार के इस फैसले की मार कम पूँजी के लोगों पर ही पड़ रही है. हमें अभी रूपये को लेकर बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही है. बैकों के बाहर तक लाइन में लोगों को खुली हवा भले ही मिल जाए पर अन्दर क्षमता से अधिक भीड़ दमघोंटू हो जाती है.
    हालांकि मधेपुरा में बैंक सरकार की इस नई योजना को पूर्ण समर्थन देते हुए लोगों को सामर्थ्यभर सुविधा देने में कहीं से पीछे नहीं है, पर लोगों की भीड़ के सामने वे भी सबों को जल्द सेवा देने में बेबस दिख रहे हैं. बाजार में कर्फ्यू जैसा दृश्य है. दुकानदारी की खाट खड़ी है. यदि जल्द हालात न सुधरे तो ‘आम’ को अभी और भी मुश्किलों के दौर से गुजरना होगा. हालाँकि, दूसरा पक्ष ये भी सत्य है कि सरकार के फैसले से भ्रष्टाचार से जमा किये धनवानों की रातें करवटें बदलते जरूर गुजर रही है.
(रिपोर्ट: प्रेरणा किरण)

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