27 जुलाई 2016

कोसी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के बाद सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे लोग

सुपौल  जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कोसी का कहर लगातार जारी है. सावन माह को प्रारंभ हुए अभी दस दिन भी नहीं बीते हैं कि कोसी नदी पूरे उफान पर पहुंच गयी है. नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. मंगलवार की रात कोसी का अब तक का सर्वाधिक डिस्चार्ज 02 लाख 85 हजार 350 क्यूसेक दर्ज किया गया. हालांकि बुधवार को कोसी के जलस्राव में थोड़ी कमी आयी है. बावजूद कोसी बराज पर अपराह्न 04 बजे कोसी का डिस्चार्ज 02 लाख 38 हजार 510 क्यूसेक दर्ज किया गया. जबकि नेपाल स्थित बराह क्षेत्र से 01 लाख 74 हजार 550 क्यूसेक पानी छोड़ा गया.
     जलस्राव में जारी वृद्धि की वजह से जिले के कोसी प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ने लगी है. कोसी की तेज धारा की वजह से अब तक सुपौल, सरायगढ़, किसनपुर, निर्मली, मरौना प्रखंड अंतर्गत प्रभावित गांव के सैकड़ों घर कोसी में समा चुके हैं. वहीं हजारों लोगों ने घर-बार छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर शरण ले लिया है. तटबंध के भीतर बसे दर्जनों गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. जिसके कारण वहां रहने वाले लोगों के समक्ष भोजन, पशु चारा व अन्य कई प्रकार के समस्या उत्पन्न हो गयी है. हालांकि सरकार व प्रशासन द्वारा बाढ़ पीड़ितों की भरपूर मदद का दावा किया जा रहा है. प्रशासन द्वारा मरौना, निर्मली व सरायगढ़ जैसे स्थानों पर आश्रय स्थल की स्थापना भी की गयी है. लेकिन हकीकत है कि तटबंध के भीतर बसे हजारों लोग आज भी बाढ़ के भीषण कहर से कराह रहे हैं.

सदर प्रखंड का दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में: कोसी की बाढ़ विभिषिका ने सदर प्रखंड के दर्जनों गांव को अपने आगोश में समा लिया है. प्रखंड क्षेत्र के 08 पंचायत बाढ़ से प्रभावित हैं. जिसमें घूरण का घीवक, गोपालपुर सिरे का चंदैल व मरीचा, बैरिया का मुंगरार, चकला, डभारी, बसबिट्टी का भुराही, मुशहरनियां, रामदतपट्टी का नेमुआ, बकौर का परसौनी, बलवा का बेला,लालगज, सुकेला, डुमरिया, नरहैया, पिपराहरी आदि गांव शामिल है. जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद इन गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. वहीं कई गांव चारों ओर से पानी से घिर चुके हैं.

तटबंध व स्परों पर विस्थापितों ने लिया शरण:  बाढ़ के कहर की वजह से प्रभावित क्षेत्र के लोग अब सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं. नदी की तेज धारा से किसी प्रकार सुरक्षित बाहर निकले लोगों ने तटबंध व स्परों पर शरण लेना प्रारंभ कर दिया है. जहां उन्हें खुले आकाश के नीचे जीवन बसर करना पड़ रहा है. घूरण पंचायत के सरपंच सुरेंद्र यादव, पंसस मो साहेब जान आदि ने बताया कि कोसी के अंदर फंसे लोगों को निकालने के लिये प्रशासन द्वारा अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. नतीजा है कि लोग जान जोखिम मे डाक कर माल-मवेशी के साथ प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं. बाढ़ प्रभावित गांव सुकैला, बलवा आदि का भी बुरा हाल है. बलवा निवासी संतोष यादव, सुकैला निवासी विंदेश्वरी यादव, घूरण निवासी मो सहादत, खुखनाहा निवासी राम बहादुर यादव आदि ने बताया कि कोसी प्रभावित क्षेत्र में सबसे अधिक समस्या नाव की कमी की वजह से हो रही है. लोगों के घर आंगन व खेत-खलिहान जल मग्न हो चुके हैं. फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुका है. वहीं कई गांव में कोसी का कटाव भी जारी है. जिसके कारण बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें और भी बढ़ गयी है.

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