21 जून 2017

शाबास! अमेरिका में मधेपुरा के युवक के नेतृत्व में भारत की टीम बनी दुनियां की नं.1

कहते हैं यदि किसी में जीतने की जिद पैदा हो जाए तो फिर उसे रोकना बेहद मुश्किल होता है. और यदि किसी की जिद दुनियां ही जीत ले तो फिर क्या कहेंगे?

जी हां, मधेपुरा के ही एक युवक के नेतृत्व में अन्तरिक्ष से सम्बंधित प्रोजेक्ट वर्क में भारतीय टीम ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान लाकर सबको चौंका दिया.

नासा के अधिकारियों की मौजूदगी में अमेरिका के टेक्सास स्टेट के स्टीफेनविले के Fine Arts Centre of the Tarleton State University में Annual International Cansat Competition में 11 और 12 जून को दुनियां भर के 92 टीमों में भारत के University of Petroleum and Energy Studies (UPES), देहरादून की संस्था ‘टीम एस्ट्रल’ ने पहला स्थान लाकर एक बार फिर यह दिखा दिया कि भारतीय प्रतिभा का दुनियां भर में तोड़ नहीं है. 

बिहार के कोसी के लोगों के लिए इस विश्व स्तरीय प्रतियोगिता के परिणाम में एक ख़ास बात यह भी रही कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान लाने वाली ‘टीम एस्ट्रल’ के टीम लीडर मधेपुरा नगर परिषद् क्षेत्र के वार्ड संख्यां 18 के सेन्ट्रल स्कूल पटना में बतौर शिक्षक पदस्थापित ब्रजेश कुमार सिंह के पुत्र व अधिवक्ता रघुवंश प्रसाद सिंह के पौत्र तथा  University of Petroleum and Energy Studies (UPES), देहरादून में  रॉकेट साइंस और एयरोस्पेस में ख़ास रिसर्च कर रहे छात्र विपुल मणि हैं.

बता दें कि Annual International Cansat Competition 2016 में विपुल मणि की टीम को विश्व में चौथा स्थान मिला था, पर सबसे ऊंचाई को छूने के जूनून ने टीम एस्ट्रल को इस बार ग्लाइडर साइंस वेहिकल के फ्लाईट से सम्बंधित प्रदर्शन में सभी पाँचों स्टेज में Application, Preliminary Design Review, Critical Design Review, Pre – Flight Readiness, Post Flight Review में बेहतरीन प्रदर्शन कर उस मुकाम को हासिल कर लिया जो इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी टीम का सपना होता है.

इस बड़ी सफलता पर विपुल मणि मधेपुरा टाइम्स से कहते हैं कि इरादे अगर मजबूत हों तो कहीं भी सफलता हासिल की जा सकती है. वैसे भी लक्ष्य और आगे बढ़ना है ताकि देश का नाम हमेशा पूरी दुनियां में रौशन रहे.
(वि. सं.)

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