06 जून 2017

नियति का क्रूर मजाक: मेहंदी के रंग छूटने से पहले ही विधाता ने बनाया विधवा

इंसान के साथ विधाता का क्रूर मजाक भी कभी-कभी ऐसा होता है जो रोंगटे खड़े कर दे. गत 26 मई को ही शादी के बंधन में बंधी पविता आज विधवा होकर पत्थर की मूरत बन गई है.

मिली जानकारी के अनुसार मधेपुरा जिले के मुरलीगंज नगर पंचायत अंतर्गत निरंजन कुमार साह (उम्र 21 वर्ष) पिता राजेंद्र साह वार्ड नंबर 8 की मौत रहिका टोला में कल अपने निवास स्थान  पर स्नान करने के क्रम में बाथरूम में लगे बिजली के तार से  भीगे हुए शरीर के स्पर्श  हो जाने के कारण हो गई। आनन-फानन में घरवाले उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरलीगंज लाए, जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए मधेपुरा भेजा गया लेकिन रास्ते में ही निरंजन कुमार की मौत हो गई।

निरंजन कुमार अपने पिता का इकलौता पुत्र था और तीन बड़ी बहनों में वह सबसे छोटा था। गौरतलब है कि पिछले ही दिनों पसराहा निवासी  वीरेंद्र साह  की पुत्री पविता कुमारी के साथ  26/5/ 2017 को  विवाह हुआ था । अभी हाथ के मेहंदी के रंग भी नहीं उतरे थे विधाता ने उन्हें विधवा बना दिया. घर का एकलौता पुत्र होने के कारण राजेंद्र साह का रो रो कर बुरा हाल है. वहीँ नवविवाहिता महज दस दिन में ही वैधव्य प्राप्त कर पत्थर की मूरत बन गई है. आँखों के आंसू अब सुख चुके हैं. भाग्य ने ये कैसा क्रूर मजाक किया शादी के दसवें दिन ही वह विधवा हो गई?

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