04 मई 2017

मधेपुरा में नशेड़ियों को थोड़ी राहत, जिले के 71 स्थानों पर बिकेगी नीरा

राज्य में शराबबंदी के लपेटे में तारी भी आ गई थी और इसके कारण तारी उतारने वाले एक पारंपरिक जाति के समक्ष भुखमरी की समस्या आ गई थी।
इस मान्यता को मजबूती से रखने के बाद महागठबंधन सरकार के समक्ष जो मजबूरी आई तो फिर तारी को परिमार्जित कर नीरा के नाम से बिक्री किए जाने की कवायद शुरू हुई है।
       उत्पाद विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब वैसे लोगो को जिन्हें तार के पेड़ पर चढ़कर तारी उतारने आता है,को नीरा बिक्री की अनुज्ञप्ति दी गई है।जिला में कुल 71 लोगो को यह अनुज्ञप्ति दी जा चुकी है।पहले यह प्रस्ताव था कि नीरा को दूध के माफिक जमा कर उसे भागलपुर के पास सबौर स्थित नीरा केंद्र में प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाएगा और वहां से पेकिंग कर उसे वापस जिले में वाहन से भेज कर बेचा जाएगा।लेकिन अब वैसा कुछ नहीं किया जाएगा । अब नीरा उतारकर उस ठंडा करने के लिए आइसक्रीम के समान बर्फ बॉक्स में रख कर बेचा जाएगा।
        तारी उतारने वाले अनुज्ञप्ति धारक उसे कैसे ठंडा कर बेचेंगे , इसके लिए उन्हें पांच मई को कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण दिया जाएगा।इसके साथ ही उन्हें यह भी बताया जाएगा कि जो नीरा नहीं बिक पाएगी उसे तारी के रूप में बेचने के बदले गुड या अन्य खाद्य सामग्री बनाकर ही बेचना है।
        प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक शराबबंदी के साथ यह नियम था कि तारी की बिक्री सिर्फ उसी पेड़ के नीचे किया जाएगा न कि बाजार में। लेकिन तारी पीने वाले पर कोई कृपा नहीं थी। लिहाजा तारी पीकर पेड़ के बाहर अगर पकड़े गए तो फिर शराबी के समान ही सीधे जेल जाना होता था।लेकिन अब सरकार का मानना है कि नीरा में कोई नशा नहीं होता है। यह जब धूप में फार्मेट होती है तभी नशीली होती है।
    बहरहाल अब नशेड़ियों को थोड़ी राहत तो मिलेगी ही।अब वे नीरा खरीद कर उसे निःशुल्क मिलने वाली धूप में रखकर लुक छिप कर अपने नशे की प्यास तो बुझा ही लेंगे।

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