17 फ़रवरी 2017

गौरव हैं बेटियां: मधेपुरा की बेटी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में रचा इतिहास

प्रतिभा शायद ही परिस्थिति का मुहताज होती है. ये मधेपुरा है और यहाँ की एक बड़ी खाशियत है कि यहाँ विषम परिस्थितियों में भी कई प्रतिभाशाली बच्चे निखर कर सामने आ जाते हैं.

     16 जनवरी 2017 को दिन के 2:00 बजे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के 99वें दीक्षांत समारोह में मुरलीगंज नगर पंचायत के वार्ड नंबर 8 निवासी रामानंद लालदास की पुत्री नेहा कुमारी को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय कुलपति डा. गिरीश चंद्र त्रिपाठी द्वारा अंग्रेजी में स्नातक प्रथम श्रेणी प्रथम से उत्तीर्ण करने पर दीक्षांत समारोह  में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया. इस मौके पर डॉ पी एन राव [भारत रत्न से सम्मानित] मौजूद थे.

माता पिता के सपनों को सच कर दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी नेहा ने
: पिता रामानंद लाल दास  पेशे से एक वकील हैं, जो 1987 से मधेपुरा व्यवहार न्यायालय में वकालत कर रहे हैं जबकि माता पूनम वर्मा भी उच्च शिक्षा प्राप्त  एम ए के साथ एल एल बी  की डिग्री प्राप्त कर चुकी है. पर बेटी नेहा ने बिहार के मधेपुरा जिले के गौरवशाली इतिहास में फिर एक अध्याय जोड़ दिया. नेहा ने बचपन की प्राइमरी शिक्षा कुछ समय के लिए  संस्कार भारती पब्लिक स्कूल मुरलीगंज  से  प्राप्त की थी फिर मध्य विद्यालय दिग्घी में अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर रही थी कि नवोदय की परीक्षा में  चयनित होने के उपरांत  मधेपुरा के  मनहरा नवोदय विद्यालय में आगे  पढाई पूरी की. नवोदय की शिक्षा प्राप्ति के उपरांत माता पिता के स्नेह  एवं प्रोत्साहन पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में  नामांकन करवाया.
      पिता रामानंद लाल दास मधेपुरा टाइम्स को बताते हैं कि उन्हें अपनी पुत्री पर हमेशा से नाज था. इस सम्मान के साथ  शहर और जिले के साथ-साथ उसने अपने माता पिता का भी नाम रोशन किया. नेहा ने बताया कि उसे आगे चलकर नेट उत्तीर्ण कर शिक्षा जगत में  जाना है. उसने बताया कि सम्मान को प्राप्त करने में हमारे विभागाध्यक्ष डॉ माया कुन्दन पाण्डेय, डॉ नारंजना श्रीवास्तव का भरपूर सहयोग और प्रोत्साहन और दिशा निर्देशन पर हम इस मुकाम तक पहुँचने में सफल हो सके हैं.
    मधेपुरा टाइम्स के माध्यम से नेहा युवाओं को सन्देश देती है कि "आज युवाओं के पास संसाधन रहते हुए भी वे भटकाव में है जिससे उन्हें बचना चाहिए. अपने लक्ष्य को पाने के लिए एकाग्रचित होकर सतत प्रयास करना चाहिए. प्रतिभाओं को परिचय की आवश्यकता नहीं होती, बस उन्हें मार्गदर्शन मिले. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में असंख्य प्रतिभाओं छिपी होती हैं, बस जरूरत होती है उन्हें एक अच्छे निर्देशन की, जिसका अभाव रहता है जिसके कारण वे कहीं-न-कहीं कुंठित हो जाते हैं।"

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...