06 अगस्त 2016

अद्भुत सफलता: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के लिए चयनित होकर गरिमा सिंह ने बढ़ाई कोसी की गरिमा

कोसी की बेटियों में वो प्रतिभा है जो राष्ट्रीय फलक पर उभर कर न सिर्फ लोगों के काम आ रही है बल्कि परिवार और समाज के उन लोगों को सही दिशा भी दिखा रही है जो वास्तव में आगे बढ़ना चाहते हैं.
    मधेपुरा की एक बेटी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जो कई छात्र-छात्राओं के लिए ऐसी प्रेरणा का काम कर सकती है जो वास्तव में मानवता को सबसे धर्म मानते हैं और उन अभिभावकों को भी पुनर्विचार का अवसर प्रदान करती है जो यह सोचते हैं कि उनके बेटे-बेटियां खूब पैसे कमाएं.
    जिले के आलमनगर प्रखंड के खुरहान गाँव के आयुर्वेद के ही चिकित्सक डॉ. आर. के. सिंह और बबीता सिंह की बेटी गरिमा सिंह ने मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम (एलोपैथ चिकित्सा) की डॉक्टर बन्ने से किनारा करते हुए आयुर्वेद में ही अपना कैरिअर चुना है और कठिन मेहनत से पहले ही प्रयास में राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा (आयुष मंत्रालय) में चयनित हो गई है.
    17 जनवरी 1999 को जन्मी और बचपन से अद्भुत प्रतिभा की धनी गरिमा को महज साढ़े तीन साल की उम्र में ही वर्ष 2003 में ताईक्वांडो में राज्य स्टार पर उम्दा प्रदर्शन करने पर तत्कालीन केन्द्रीय कोयला मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने ‘बाल रत्न’ से सम्मानित किया था. गरिमा खेल में बेहतरीन प्रदर्शन के कारण तत्कालीन खेल मंत्री अशोक सिंह और वाणिज्य कर मंत्री ददन पहलवान से भी सम्मानित हुई थी.
    गरिमा की प्राथमिक शिक्षा मधेपुरा के माया विया निकेतन में हुई जबकि मैट्रिक शान्ति मिशन एकेडमी, सहरसा से पास करने के बाद गरिमा ने ‘अपियारिंग कैंडिडेट’ के रूप में इस बार मेडिकल की परीक्षा दी थी. बाद में प्रकाशित परिणाम में गरिमा को I.Sc. में बायोलॉजी में 95% अंक प्राप्त हुए.
   नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा में B.A.M.S. (Ayurvedacharya) 2016-2017 के लिए देश में 212वें रैंक के साथ चयनित होने के बाद मधेपुरा टाइम्स स्टूडियो में एक साक्षात्कार के दौरान गरिमा कहती है कि मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम से बहुत सारे लोग फेड-अप हो चुके हैं. बड़ी बात है कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में रोगियों को किसी साइड इफेक्ट्स से गुजरना नहीं होता है और ये अत्यंत पुरानी और कारगर चिकित्सा पद्धति है, जिसे लाइफ का सुपर सायंस इसलिए भी कहा जाता है कि ये न सिर्फ आपके शरीर को ही स्वस्थ रखता है बल्कि आपके मन और आत्मा को भी संतुलित रखता है.
        पिता को अपना आदर्श मानने वाली कोसी की बेटी गरिमा अपनी सफलता का श्रेय ‘सेल्फ स्टडी’ को देती है. जाहिर है एक तरफ जहाँ मेडिकल को कैरिअर चुन अधिकांश एलोपैथ चिकित्सक आज मरीजों का शोषण कर खुद करोड़पति बनने की चाहत में रहते हैं वहां उस चकाचौंध से दूर रह कर स्वेच्छा से आयुर्वेद के माध्यम से लोगों की सेवा करने का मन बना चुकी गरिमा इलाके के छात्र-छात्राओं को सफलता के लिए सन्देश देते कहती है कि वे अपना एक लक्ष्य तय कर उस पर ‘प्रॉपर स्ट्रेटजी’ के साथ तैयारी करें तो सफलता हर हाल में मिलनी तय है. 
मधेपुरा टाइम्स कार्यालय में गरिमा सिंह के साक्षात्कार का वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें.
(रिपोर्ट: आर. के. सिंह)

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