25 जुलाई 2016

महा पंचायतः अगर अब टूटा घर तो काट देंगे कोसी तटबंध

सुपौल। कोसी से विस्थापित सैकड़ो लोगों ने प्रशासन पर गैर कानूनी तरीके से काम करने का आरोप लगाते हुए जिला मुख्यालय के वार्ड नंबर एक स्थित पुनर्वास मुहल्ले में महा पंचायत बुला कर प्रशासनिक कार्रवाई के विरुद्ध कई कड़े निर्णय लिये हैं.
     महा पंचायत में उपस्थित सैकड़ों विस्थापित परिवार के सदस्यों ने प्रशासन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए एक स्वर में कहा कि वर्षों से बसे बाढ़ विस्थापितों के घर को यदि प्रशासन द्वारा बल पूर्वक तोड़ा गया तो सभी विस्थापित परिवार एकजुट हो कर कोसी तटबंध को काट देंगे.
       गत दिनों पुनर्वास मुहल्ला में लोकायुक्त के आदेश पर स्थानीय प्रशासन द्वारा दो घरों को तोड़ दिया गया था. इस घटना के बाद स्थानीय पुनर्वासित प्रशासन के इस कार्रवाई से नाराज चल रहे थे. महापंचायत के दौरान गठित की गयी कमेटी पुनर्वास मुहल्ले के सभी समस्याओं के साथ-साथ मुहल्ला के विकास के लिए कार्य करेगी.
वर्षों से ठगे जा रहे हैं कोसी पीड़ित: महा पंचायत में उपस्थित सैकड़ों लोगों की जुबान से बार-बार यही बातें सुनने को मिल रही थी कि कोसी तटबंध के निर्माण के समय से ही उन लोगों के साथ सरकार व प्रशासन द्वारा सौतेला व्यवहार किया जा रहा है.
         इसके अलावे विस्थापित परिवारों ने बताया कि कोसी तटबंध के निर्माण काल में जब उन लोगों ने विरोध दर्ज किया तो स्थानीय बैरिया मंच पर पहुंचे देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने लोगों को समझाते हुए कहा था कि उनकी एक आंख कोसी तटबंध के भीतर रहेगी.
          वहीं पूर्वी व पश्चिमी कोसी तटबंध के बीच बसे लोगों को तटबंध के बाहर पुनर्वासित करने, प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को जीविकोपार्जन के लिए सरकारी नौकरी देने,  सरकारी नौकरियों में तटबंध के भीतर बसे लोगों को आरक्षण आदि दिये जाने की घोषणा की गयी थी.
        लेकिन कुछ लोगों को पुनर्वासित कर शेष बचे लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया. विस्थापित परिवारों की मानें तो पुनर्वासित किये जाने के बाद उनके जीविकोपार्जन के लिए किसी प्रकार का प्रबंध नहीं किये जाने का नतीजा है कि आज भी हजारों परिवार कोसी तटबंध के भीतर बाढ़ व कटाव का दंश झेलने को विवश हैं.
घर तोड़ने से पूर्व बसाने का हो प्रबंध: महा पंचायत में उपस्थित विस्थापित परिवारों ने कहा कि वे लोग कोसी नदी के कटाव से विस्थापित होने के बाद पुनर्वास के लिए चिन्हित स्थल पर आ कर बसे हैं।बताया कि प्रशासन द्वारा यह कहा जा रहा है कि उक्त जमीन दूसरे के नाम पर आवंटित है. जबकि उन लोगों को जहां पुनर्वास मिला था उस पर किसी तीसरे ने कब्जा जमा रखा है.
     अब सवाल उठता है कि प्रशासन विस्थापित लोगों की समस्या को देखते हुए उजाड़ने से पूर्व बसाने का प्रबंध क्यों नहीं कर रही है?

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