12 मई 2016

11वीं की परीक्षा में कदाचार का बोलबाला

ये तस्वीर है मधेपुरा में चल रही 11वीं की परीक्षा की और केंद्र है जिला मुख्यालय का कॉमर्स कॉलेज. पर ऐसा हाल सिर्फ एक कॉलेज का नहीं है, कमोबेश पूरे जिले में 11वीं की परीक्षा में कदाचार की गंगा बह रही है. इसे देखकर कहीं से नहीं लगता है कि ये ‘परीक्षा’ है, इसे ‘स्वेच्छा’ कहना शायद उचित होगा.
    जिले के विभिन्न कॉलेजों में 11वीं की वार्षिक परीक्षा बिहार विद्यालय उच्च माध्यमिक परीक्षा समिति के निर्देश पर ली तो जा रही है, पर जिस तरीके से परीक्षा ली जा रही है उस पर सवाल उठन लाजिमी है.
    जिले के कई परीक्षा केन्द्रों पर कदाचार का बोलबाला है. यही नहीं, कई केन्द्रों पर तो परीक्षा कक्ष से बाहर भी प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिका पर अभिभावकों को दिमाग लगाते देखा जा सकता है.
        ऐसे में छात्र संगठनों की ओर से यह सवाल उठना लाजिमी है कि एक तरफ जहां मैट्रिक और इंटर की परीक्षा बन्दूक की नोक पर ली जाती है वहीं बीच वाली इस परीक्षा की दुर्गति क्यों अधिकारियों ने निकाल रखी है. मधेपुरा के एबीवीपी के राशीद आलम कहते हैं कि जिला प्रशासन का इस परीक्षा पर ध्यान नहीं देना जिले की शिक्षा के लिए ठीक नहीं है. इससे छात्रों का भविष्य ख़राब हो रहा है और अभी चोरी का स्वाद चख चुके छात्र ही इंटर में कदाचार की जिद पर उतर आते हैं.
        वहीँ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के संयोजक राहुल यादव कहते हैं कि 11वीं की परीक्षा के दृश्य जिले को फिर एक बार शर्मिंदा करने के लिए काफी है. आखिर शिक्षा विभाग क्यों कान में तेल डाले सोया हुआ है.
      बताया गया कि डीईओ की पकड़ इन परीक्षाओं पर ढीली पड़ गई है और निजी कॉलेजों ने तो इसे पास कराने का ठेका ही ले रखा है. जाहिर है, यहाँ नहीं तो वहां, शिक्षा माफियाओं को चांदी काटने से रोकना मुश्किल ही लग रहा है.
(नि.सं.)

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