इस अवसर पर सम्मानित होने के उपरांत पूर्व कुलपति प्रो. आर. के. पी. रमण ने कहा कि शिक्षक से बड़ा कोई पद नहीं है। उनका यह सौभाग्य है कि उन्हें शिक्षक बनकर अपने गृह जिले में कार्य करने का अवसर मिला। यह सम्मान उन्हें आगे और बेहतर करने की प्रेरणा देता रहेगा।
अतिथियों का स्वागत करते हुए स्वागताध्यक्ष प्रो. प्रसन्ना सिंह ने बताया कि यह आयोजन आजाद पुस्तकालय द्वारा मधेपुरा जिला स्थापना दिवस के वार्षिक आयोजन की एक कड़ी है।
अध्यक्षीय संबोधन देते हुए आजाद पुस्तकालय के अध्यक्ष प्रो विनय कुमार चौधरी ने कहा कि आजाद पुस्तकालय की चयन समिति द्वारा इस पुरस्कार हेतु आधे दर्जन नामों पर चर्चा उपरान्त सर्वसम्मति से प्रो. ( डॉ.) आर.के.पी. रमण का चयन किया गया। इसका मुख्य कारण यह है कि प्रो. रमण हमेशा एक शिक्षक बने रहे। कुलपति जैसे ऊंचे पद पर जाने, सेवानिवृत होने के बाद भी वे छात्रों के लिए सहज उपलब्ध रहते हैंं। यह उन्हें उन्हे आदर्श शिक्षक की श्रेणी में स्थापित करती है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि जिले के मुरलीगंज प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत हरिपुरकला गांव के रहने वाले और प्रो. रमण ने मधेपुरा में छात्र से लेकर शिक्षक, प्रधानाचार्य, परीक्षा नियंत्रक, निदेशक (नियुक्ति कोषांग) स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाते हुए कुलपति तक का सफर तय किया है। इसके बावजूद उन्होंने कभी भी अपनी सहजता एवं विनम्रता नहीं छोड़ी। यही उनकी मुख्य पहचान है, जौ उन्हें एक आदर्श शिक्षक एवं मुकम्मल मनुष्य की श्रेणी में स्थापित करती है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए आजाद पुस्तकालय के सचिव डॉ. हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि प्रो. रमण लोकप्रिय शिक्षक रहे हैं। इसी की बानगी है कि वे एक विद्यार्थी के पहुंचने पर भी पूरी मुस्तैदी से कक्षा में व्याख्यान देते थे और विद्यार्थियों को प्रश्न पुछने के लिए प्रोत्साहित करते थे। अपने छात्रों को पढ़ाते और समझाते समय वो अक्सर इतना खो जाते हैं कि आसपास की खबर भी नहीं रहती।
उन्होंने बताया कि प्रो. रमण बीएनएमयू में बतौर कुलपति अपना कार्यकाल पूरा करने वाले पहले स्थानीय व्यक्ति होने का गौरव भी रखते हैं।
इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत सर्वप्रथम दीप प्रज्ज्वलन एवं जिले की महान हस्तियों के तस्वीर पर पुष्पांजलि के साथ हुई। सभी अतिथियों ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके योगदान को भी याद किया।
इस अवसर पर प्रो मणिभूषण वर्मा,शंभु शरण भारतीय आदि ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर पूर्व कुलपति प्रो आर के पी रमन का सम्मान उनकी विद्वता का सम्मान है जो बतौर शिक्षक आदर्श के प्रतीक हैं।
कार्यक्रम में भारतेंदु ,डॉक्टर माधव कुमार, युवा नेता सौरव कुमार, राकीब, आर्यन, मसिरा, आलिया, आलेख सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
September 04, 2026
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