गौतम कुमार की यह सफलता किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि स्वतंत्रता संग्राम, सैन्य सेवा और जनसेवा से जुड़ी हुई है। वह भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) और रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी अनिल कुमार सिंह के सुपुत्र हैं। उनके दादा, स्वर्गीय कॉमरेड अनिरूद्ध प्रसाद सिंह, आज़ादी के मतवाले, स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व मुखिया और सीपीआई (एमएल) से विधायक पद के उम्मीदवार रहे थे। उनकी जड़ें बिहार के आलमनगर, गांव शाहजादपुर (मधेपुरा) से जुड़ी हैं, जहां से उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की।
पारिवारिक विरासत और संघर्ष:
गौतम के दादा स्वर्गीय कॉमरेड अनिरूद्ध प्रसाद सिंह का जीवन संघर्ष और बलिदान की गाथा है। एक ओर जहां वे कम्युनिस्ट विचारधारा (CPI-ML) से जुड़े क्रांतिकारी थे, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण जनता के लिए वे एक मसीहा थे। गांव के मुखिया के रूप में उन्होंने विकास की अनेक योजनाएं धरातल पर उतारीं। उनके पिता अनिल कुमार सिंह ने देश की सुरक्षा में वायुसेना और रेलवे में सेवा देकर अपना योगदान दिया। इस माहौल में पले-बढ़े गौतम में देशभक्ति, अनुशासन और जनसेवा के संस्कार स्वाभाविक रूप से आए।
कानूनी सफर:
मधेपुरा के स्कूली जीवन के बाद गौतम ने कानून की पढ़ाई की और दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट से अपने करियर की शुरुआत की। मेहनत, लगन और स्पष्टवादिता के बल पर वे शीघ्र ही सुप्रीम कोर्ट में अपनी पहचान बनाने में सफल रहे। आज उनकी गिनती सुप्रीम कोर्ट के उभरते हुए सक्रिय वकीलों में होती है।
ऐतिहासिक जीत पर प्रतिक्रिया:
इस ऐतिहासिक जीत पर गौतम कुमार ने कहा, "यह मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि मेरे दादा के सपनों और मेरे पिता के संघर्ष का परिणाम है। मधेपुरा की धरती ने मुझे जो संस्कार दिए हैं, वही मेरी पूंजी है। मैं सुप्रीम कोर्ट के अंदर वकीलों के हितों की रक्षा के साथ-साथ न्याय की सुलभता को बढ़ाने का प्रयास करूंगा। मेरा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों के वकीलों की आवाज भी सुप्रीम कोर्ट के मंच पर सुनी जाए।"
क्षेत्र के लिए गौरव:
गौतम की इस उपलब्धि से मधेपुरा, आलमनगर और शाहजादपुर गांव में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें ढेरों बधाईयां दी हैं। वहां के युवाओं के लिए गौतम प्रेरणास्रोत बन गए हैं, यह साबित करते हुए कि अगर इरादे मज़बूत हों तो छोटे से गांव से निकलकर भी देश की सबसे बड़ी अदालत में अपनी जगह बनाई जा सकती है।
(वि. सं.)
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
August 26, 2026
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