घेराव कार्यक्रम में गरीबों की बस्तियों को उजाड़ने पर रोक लगाने, भूमिहीनों को पर्चा एवं 5 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने, मनरेगा को पुनः बहाल करने, ग्रामजी (जी-रामजी) कानून वापस लेने तथा मजदूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करने जैसी मांगें प्रमुख रहीं।
इस मौके पर भाकपा–माले जिला सचिव रामचंद्र दास ने कहा कि डबल इंजन सरकार चुनावी हेराफेरी के सहारे सत्ता में आकर दलितों और गरीबों पर हमला कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बुलडोजर कार्रवाई के नाम पर हजारों गरीबों के घर तोड़ दिए गए, जिससे भीषण ठंड में लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। कई परिवारों की बेटियों की शादियां तक टूट या रुक गई हैं।
भाकपा–माले जिला कमेटी सदस्य मनोरंजन सिंह ने कहा कि बिहार में दशकों से बसी करीब 30 प्रतिशत बस्तियों को आज तक नियमित नहीं किया गया। दलित और आदिवासी परिवारों को न तो पर्चा-पट्टा मिला है और न ही उन्हें इंदिरा आवास या प्रधानमंत्री आवास जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
मुरलीगंज प्रभारी कैलाश ऋषिदेव ने आरोप लगाया कि संविधान और सामाजिक न्याय की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। महादलित और अतिपिछड़ा समाज की बात करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौन हैं और भाजपा नेताओं का दबाव सरकार पर हावी है।
इंकलाबी नौजवान सभा के मधेपुरा अध्यक्ष कृष्ण कुमार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अडानी–अंबानी समर्थित नीतियों के जरिए गरीब और मजदूर वर्ग को गुलामी की स्थिति में धकेला जा रहा है। वहीं आइसा जिला सचिव पावेल कुमार ने कहा कि एक ओर दलितों के घर उजाड़े जा रहे हैं, दूसरी ओर सरकार कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा दे रही है।
घेराव कार्यक्रम में विणा देवी, बेबी देवी, सज्ञान देवी, दुखनी देवी, महिंद्रा ऋषिदेव, दिलो ऋषिदेव, चमरू ऋषिदेव, बालकिशोर ऋषिदेव, प्रमोद दास सहित बड़ी संख्या में भाकपा–माले और जन संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद थे।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
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January 05, 2026
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