राज्य विश्वविद्यालय कार्य प्रमुख श्री सौरभ यादव ने कहा कि कोशी जैसे पिछले इलाके में इस प्रकार से माइग्रेशन और मूल प्रमाण पत्र की फीस चार-चार गुना बढ़ा देना कहीं से भी उचित नहीं है। कोशी जैसे पिछड़े इलाके के छात्र पहले तो विश्वविद्यालय आने के लिए आर्थिक संकट से जूझते हैं । कई छात्र तो खराब आर्थिक स्थिति होने के वजह से विश्वविद्यालय आ भी नहीं पाते हैं ऐसे में जहां माइग्रेशन शुल्क पहले ₹ 250 थी उसे बढ़ाकर अब ₹600 कर दिया गया और जहां पहले ₹200 मूल प्रमाण पत्र का शुल्क था उसे₹ 600 कर दिया गया। यह कहीं से भी न्याय संगत नहीं है।
प्रांत एसएफएस प्रमुख आमोद आनंद ने कहा कि वर्तमान परीक्षा नियंत्रक के वजह से इतनी फीस को बढ़ाया गया है। वर्तमान परीक्षा नियंत्रक किसी भी नीति निर्धारण में आम और गरीब छात्रों का ख्याल नहीं रखते हैं ।उनके द्वारा हमेशा ऐसा तानाशाही रवैया अपनाया जाता है जिससे कि गरीब दलित और पिछड़े छात्रों का ओर शोषण विश्वविद्यालय के बिचौलियों के द्वारा किया जा सके।
वहीं जिला संयोजक नवनीत सम्राट ने कहा कि वर्तमान परीक्षा नियंत्रक अब कई दलाल और माफिया के इशारे पर कई सारे निर्णय को ले रहे हैं जिसके वजह से आम छात्रों को अब कठिनाई हो रही है. ऐसे में गरीब छात्र कैसे पढ़ाई कर पाएंगे जो माइग्रेशन का शुल्क पहले केवल ₹ 250 था अब उसके लिए ₹600 देना पड़ रहा है और तत्काल शुल्क₹500 से बढ़ा कर 1200 कर दिया गया जो कहीं से भी न्याय संगत नहीं है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आम और गरीब छात्रों के हितों को विश्वविद्यालय प्रशासन कुचलने का काम कर रही है। वहीं उन्होंने कहा कि अभी हाल में ही जारी PAT के परीक्षा परिणाम में भी कट ऑफ और आरक्षण रोस्टर को पालन नहीं किया गया। अगर ऐसी स्थिति रही तो विश्वविद्यालय में कसी के गरीब पिछड़े और शोषण छात्रों का आर्थिक दोहन होगा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस फीस बढ़ोतरी का पुरजोर विरोध करती है और अगर विश्वविद्यालय प्रशासन से वापस नहीं लेती है तो विद्यार्थी परिषद आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
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January 16, 2026
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