एक कविता सुनाऊंगा

एक कविता सुनाऊंगा
तुम्हारे सामने बैठूँगा
तुम्हारे हाथ में हाथ धर
एक कविता सुनाऊंगा.
..........
नयन से नयन मिलाऊंगा
मंद मंद मुस्कुराऊंगा,
कल कल बहेगी
प्यार की गंगा
एक कविता सुनाऊंगा.
..............
भूल चुके हैं लोग
प्रेम के शब्द
उन शब्दों की ज्योति जलाऊंगा.
तुम ही हो मेरी प्रेरणा.
तुम्हारे हाथ में हाथ धर
एक कविता सुनाऊंगा.

--उल्लास मुखर्जी, सदर अस्पताल. मधेपुरा.
एक कविता सुनाऊंगा एक कविता सुनाऊंगा Reviewed by मधेपुरा टाइम्स on January 13, 2012 Rating: 5

3 comments:

  1. भावों से नाजुक शब्‍द......बेजोड़ भावाभियक्ति....

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  2. क्या खूब लिखते हो ,बड़ी सुन्दर लिखते हो
    और लिखो , लिखते रहो ,बड़े अच्छे लिखते हो

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