ग्रामीणों के अनुसार अब तक दर्जनों बाइक और टोटो सवार इस सड़क पर दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया गया है। यह सड़क मुरलीगंज और बिहारीगंज को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है, जहां से प्रतिदिन प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और हजारों लोगों का आवागमन होता है, लेकिन सड़क की बदहाल स्थिति पर अब तक गंभीर पहल नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे बसे अधिकांश लोगों ने अपने घर और दरवाजे सड़क से ऊंचे कर लिए हैं। वहीं नालियों का निर्माण नहीं होने के कारण बारिश का पानी सीधे सड़क पर आकर जमा हो जाता है। लगातार जलजमाव और भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क तेजी से टूट रही है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि स्टेट हाईवे के किनारे कई जगह अतिक्रमण है। लोग सड़क किनारे मवेशियों का गोबर, खलिहान का सामान और अन्य सामग्री रख देते हैं, जिससे जल निकासी और यातायात दोनों प्रभावित होते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की 'नली-गली योजना' का लाभ आबादी वाले उन क्षेत्रों तक नहीं पहुंचा, जहां स्टेट हाईवे गुजरता है। यदि पंचायत स्तर पर जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाती, तो सड़क पर जलजमाव और इसके कारण सड़क टूटने की समस्या काफी हद तक रोकी जा सकती थी।
इधर, इस संबंध में पूछे जाने पर आरसीडी के कार्यपालक अभियंता रणधीर कुमार ने बताया कि दो से तीन दिनों के भीतर क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
(तस्वीर में कोल्हायपट्टी गांव के पास एसएच-91 पर सड़क पर जलजमाव, बड़े गड्ढे और दोनों ओर अतिक्रमण के कारण आवागमन में हो रही परेशानी साफ देखी जा सकती है।)
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
July 13, 2026
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