व्यर्थ है यह सपना

रहमदिल नेताईन ने नेताजी से,
व्यथित स्वर में कहा;
जनहित में कुछ कीजिए,
अब बहुत खून बहा.
जाति-धर्म की ओट में चलता,
राजनीति का खेल;
निर्दोष सदा ही मारे जाते हैं,
आपस में रहा न मेल.
बेचारी जनता सीधी है,
उसे बचा लो नाथ!
वह उपकार नहीं भूलती,
सदा रहेगी साथ.
..........
दार्शनिक अंदाज में नेता बोला,
सुन मेरी भोली;
चुनाव भी जीता मैनें,
खेलकर खून की होली.
ग्राहक,मौत और मतदाता को,
समझो कभी न अपना,
चिंता तू मत कर प्यारी,
व्यर्थ है यह सपना.


--पी० बिहारी बेधड़क, मधेपुरा
व्यर्थ है यह सपना व्यर्थ है यह सपना Reviewed by मधेपुरा टाइम्स on January 18, 2012 Rating: 5

3 comments:

  1. site me weather forcasting only madhepura zila ka ek parmanent source code insert kar de jo har 4 hour per updated

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