27 जनवरी 2017

अद्भुत गायकी: “राजीव तोमर या भोला नहीं ‘राजीव जलोटा’ कहिये भाई साहब....”

कहते हैं गौरवशाली बिहार की ये कोसी उस मंडन मिश्र की धरती है जिनके तोते भी संस्कृत बोला करते थे और जहाँ आकर शंकराचार्य को भी हार माननी पड़ी थी.

     विभिन्न विधाओं में अद्भुत प्रतिभा की हमारी खोज के परिणाम  में मधेपुरा टाइम्स के स्टूडियो में 68वें गणतंत्र दिवस पर जब सुर की छटा बिखेरकर लोगों को सम्मोहित करने वाले मधेपुरा के एक गायक ने अपनी अद्भुत गायकी का नमूना पेश करना शुरू किया तो श्रोता ये भूल गए कि सामने भारत के महान भजन सम्राट अनूप जलोटा नहीं कोई और गा रहा है.
    कोसी की धरती वर्तमान में जिन प्रतिभाओं पर गर्व करती है उनमें राजीव तोमर उर्फ़ भोला जी का नाम भी शान के साथ शुमार किया जा सकता है. 01 मार्च 1977 को जन्मे मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर प्रखंड के इटहरी गाँव के चन्द्र नारायण सिंह के पुत्र राजीव ने चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से संगीत में एम. ए. किया है और वर्ष 1996 से खुद को संगीत में ही समर्पित कर दिया है. जाहिर है जहाँ संगीत पूजा है, साधना है और इस गायक ने संगीत की तपस्या में जहाँ दिन-रात एक कर दिया है तो फिर पहचान तो बननी ही है. राजीव तोमर को जहाँ राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2009 के युवा उत्सव में सम्मानित किया जा चुका है तो सुपौल समेत मधेपुरा के सिंहेश्वर महोत्सव में भी अपनी शास्त्रीय संगीत का लोहा मनवा कर सम्मान हासिल कर चुके हैं. इसी महीने पटना के आईएमए हॉल में रेणुका आर्ट्स की तरफ से राजीव तोमर उर्फ़ भोला जी को विरासत सम्मान में नवाजा गया है.

    मधेपुरा टाइम्स के स्टूडियो में आमंत्रित राजीव तोमर बताते हैं कि संजीव यादव और पंडित शैलेन्द्र नारायण सिंह यदि गुरु के रूप में न मिले होते तो शायद ये तपस्या सफल नहीं होती. महान भजन सम्राट अनूप जलोटा को अपना आदर्श मानने वाले राजीव तोमर की गायकी को मधेपुरा टाइम्स स्टूडियो में तबले की थाप से निखारने का श्रेय मधेपुरा के बेलाड़ी निवासी तबला वादक अजय पोद्दार को जाता है जिन्होंने संगीत से प्रभाकर की डिग्री हासिल की है और अपने गुरुदेव सहसराम (सहरसा) के अरूण यादव का नाम लेना नहीं भूलते हैं जिनकी बदौलत उन्हें तबला में अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका मिल पाया है.

      पिछले दिनों बॉलीवुड तथा गीत-संगीत से जुड़ी कई हस्तियों से बातचीत के आधार पर हमारा अनुभव ये कहता है कि संगीत जैसी कठिन विधा में महारत हासिल करना कहीं से आसान नहीं है. ऐसे में जब हमने राजीव तोमर का गाया अनूप जलोटा का एक भजन पाठकों के सामने प्रतिक्रिया के लिए रखा तो इनके लिए प्रशंसा के पुल बंध गए और ये आवाज आई कि “राजीव तोमर या भोला नहीं ‘राजीव जलोटा’ कहिये भाई साहब....”
तो आप भी सुनिए राजीव तोमर (जलोटा) से तीन गाने, लिंक नीचे है.

‘ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन...यहाँ क्लिक करें’
‘मेरे मन में राम तन में रोम-रोम में राम रे...यहाँ क्लिक करें’
‘मुझसे मिलने शमां जलाकर ताजमहल में आ जाना...यहाँ क्लिक करें’.


(रिपोर्ट: आर. के. सिंह, वीडियो रिकॉर्डिंग: मुरारी सिंह)

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