07 नवंबर 2016

‘मधेपुरा समेत कोसी में आंत का कैंसर काफी तेजी से फैल रहा है’: डा0 मनीष

कुसहा त्रासदी 2008 के बाद कोसी प्रमंडल के मधेपुरा सहरसा एवं सुपौल जिले में बड़ी आंत में होने वाले कैंसर के रोगियों की संख्या में काफी तेजी से वृद्धि हो रही है, जो इस इलाके के लिए खतरनाक संकेत है.
इसका खुलासा IGIMS (इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान) पटना के डिप्टी सुपरीटेंडेंट सह एच0ओ0डी0, जी0आई0 विभाग एवं प्रवक्ता डा0 मनीष मंडल ने IGIMS पटना में कोसी प्रमंडल के प्रभावित रोगियों द्वारा ईलाज के लिए कराये गये पंजीकरण के आधार पर किया है.
            डा0 मंडल ने मधेपुरा स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आई0जी0आई0एम0एस0 पटना में ईलाजरत बड़ी आंत के कैंसर रोगी में 25 प्रतिशत रोगी कोसी प्रमंडल एवं अगल-बगल जिले के ही होते हैं. उन्होंने कहा कि शुरूआती दौड़ में बड़ी आंत का कैंसर होने पर सिर्फ गैस की शिकायत होती है और इसके बाद बदहजमी फिर कब्ज की शिकायत होती है. फिर कब्ज ज्यादा बढ़ने पर पेट फूलने लगता है तब ज्यादा तकलीफ मरीज को आंत में रूकावट होने से होती है. जब दर्द और आंत में रूकावट होती है तब मरीज डॉक्टर के पास आते हैं. इस बीमारी का पता अल्ट्रासाउंडऔर कोलोनोस्कोपी से चलता है. CTScan से पता यह भी चल जाता है कि ऑपरेशन से ठीक होगा या नहीं.
      डा0 मंडल ने कहा कि ये रोग बाढ़ के बाद से काफी तेजी से होने लगा है. इसका कारण है कि कोसी क्षेत्र एवं अगल-बगल के कुछ जिले के पानी की शुद्धता पर काफी प्रभाव पड़ा है तथा पानी लेबल बहुत उपर है और इस क्षेत्र में नकली रासायनिक उर्वरक खेतों में ज्यादा डाला जाता है. इसके अलावे पोलीथीन का उपयोग आम लोग ज्यादा मात्रा में करते हैं. ये तमाम रासायनिक उर्वरक एवं पोलीथीन सड़ने के बाद पानी मे मिल जाता है और उसी पानी को चापाकल एवं अन्य माध्यम से लोग पीते हैं. इसके अलावे आजकल फास्ट-फूड का प्रचलन भी बढ़ गया और बाजार में शुद्ध तेल-घी के जगह नकली व मिलावटी ज्यादा मिलने लगा है. इस तरह के खान-पान से हमारे पाचन तंत्र में प्रतिकूल असर करते हुए कब्ज व कैंसर पैदा कर रहा है. डा0 मंडल ने कहा कि अगर लोग खान-पान पर संजीदगी रखें तो इस तरह के खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है. हर किसी को कोशिश करना चाहिए कि रेशेदार खाना खाएं और चाईनीज फ़ूड न खाएं. पानी उबाल कर या फिल्टर करके पीएं. खाना खाने के आध घंटा बाद पानी पीएं ताकि पाचन तंत्र को पचाने का मौका मिल सके जिससे कब्ज नहीं हो सके.

अब किडनी आंख और लिवर बदलने के रोगी को नहीं जाना पड़ेगा बिहार से बाहर: IGIMS पटना में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू गई है. यह बिहार में पहली बार संभव हुआ है. यह सुविधा आई0जी0आई0एम0एस0 पटना में मात्र ₹ 4 लाख में उपलब्ध है. जबकि प्राईवेट संस्थान में बिहार से बारह दस से पन्द्रह लाख लगता है. अब तक में IGIMS में 15 रोगी का किडनी ट्रान्स्प्लान्ट किया जा चुका है. डा0 मंडल ने कहा कि अब कौर्नियाँ ट्रांसप्लांट भी प्रारंभ किया गया है. अब तक एक सौ लोगों को आंख की रौशनी मिल चुकी है. इसके अलावे डा0 मंडल ने कहा कि अब बहुत जल्द ही IGIMS में लिवरट्रान्स्प्लान्ट भी प्रारंभ् हो जाएगा. इसके लिए सभी तरह का संयंत्र लगना भी शुरू हो जाएगा.
(Report: Rudra Narayan Yadav, Editor)

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