22 जून 2016

नगर परिषद् में सूअरों का आतंक: कई जनप्रतिनिधि सूअरों से भी बदतर!

 मधेपुरा नगर परिषद् का क्षेत्र अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की बेरहम उपेक्षा का शिकार हो चला है और ऐसे में चाहे इस इलाके में रेल इंजन कारखाना का निर्माण हो या फिर मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेज बन जाए, यहाँ रहना दूभर ही होगा.
    दुनियां के सबसे घटिया और बदसूरत नगर परिषद् क्षेत्रों में से एक मधेपुरा नगर परिषद् में नालों की स्थिति आपको लूट की लम्बी दास्तां सुनाएगी वहीँ कई वार्ड पार्षदों की करतूत से जिला मुख्यालय शर्मशार हो रहा है. सडकों पर जहाँ कचरों का अम्बार आपको बच-बच के चलने को बाध्य करेगा वहीँ सूअरों के आतंक ने शहर की सडकों पर भले लोगों को निकलने लायक नहीं छोड़ा है. वार्डों की गलियों और अब आपके कैम्पस तक सूअर अपनी पहुँच बना चुके हैं.
    बीती रात की बारिश के बाद जब मिट्टी हलकी हुई तो आज सुबह से शाम तक सूअरों ने नगर परिषद् क्षेत्र में सैंकड़ों जगह कच्ची गलियों में अपना उत्पात मचाया है और बड़े-बड़े गड्ढे कर डाले. कई जगह लोग कुदाल लेकर कच्ची गलियों को ठीक करते और जन-प्रतिनिधियों को भला-बुरा कहते नजर आ रहे थे. बता दें कि नगर परिषद् क्षेत्र में अभी भी कई वैसी गलियां कच्ची हैं जहाँ के लोगों ने जनप्रतिनिधियों को बाप-भईया कहकर बनवाने के लिए खुशामद नहीं की या फिर जहाँ जनप्रतिनिधियों को बड़े लूट की गुंजाइश कम दिखी. कई लोगों का कहना था कि चुनाव में किये गए खर्च ये समय-समय पर अपने नेता चुनने में ये वसूल कर पूरे पांच साल खामोश रहते हैं तो ऐसे में विकास क्या ख़ाक होगा?
    दबे स्वर में कुछ लोगों का कहना था कि मधेपुरा नगर परिषद् क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि को सूअर से बदतर कहा जाय तो शायद गलत नहीं होगा. कई लोगों ने कहा कि बस जुलाई में ही तो अविश्वास प्रस्ताव लग रहा है, देख लीजियेगा, कितनी बार ये बेचे और खरीदे जाते हैं. मधेपुरा टाइम्स ने इस मुद्दे पर किसी की प्रतिक्रिया लेनी उचित नहीं समझा.
(नि.सं.)

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