इस दौरान अभाविप की राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य समीक्षा यदुवंशी ने आरोप लगाया कि कुलपति नियमों को ताक पर रखकर UMIS का बचाव कर रहे हैं तथा संगठित भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब UMIS का करार समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद विश्वविद्यालय के कार्य उससे लिए जा रहे हैं, जो राशि के दुरुपयोग का संकेत देता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि UMIS को संरक्षण देने के कारण विश्वविद्यालय के कई अधिकारी और कर्मचारी प्रताड़ित हो रहे हैं तथा कुलपति अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।
वहीं अभाविप के बिहार राज्य कार्य प्रमुख सौरभ यादव ने कहा कि UMIS से जुड़े कथित भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के लिए कुलपति हर तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यार्थी परिषद द्वारा जारी पोस्टर को फाड़ने की घटना भी इसी का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में मंडल विश्वविद्यालय के इस मुद्दे की चर्चा है, लेकिन कुलपति अपने जिद और तानाशाही रवैये के कारण UMIS के संरक्षक बने हुए हैं।
जिला संयोजक नवनीत सम्राट ने कहा कि समर्थ पोर्टल को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों को दी गई है, उन्हें UMIS के माध्यम से प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि कुलपति इस पर मौन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे विश्वविद्यालय की गौरवशाली छवि धूमिल हो रही है।
अभाविप ने चेतावनी दी है कि जब तक विश्वविद्यालय में समर्थ पोर्टल पूरी तरह लागू नहीं किया जाता और UMIS को परिसर से बाहर नहीं किया जाता, तब तक चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर मेघा मिश्रा, सत्यम, बबलू, प्रदेश कार्यकारणी सदस्य मनीष कुमार, विवेक कुमार, अंकित, आदित्य आदि उपस्थित थे.
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
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April 04, 2026
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