दवा दुकानों के बंद रहने के कारण खासकर जीवन रक्षक दवाओं के लिए लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ा। 24 घंटे की इस हड़ताल के चलते थोक एवं खुदरा दवा कारोबार पूरी तरह प्रभावित रहा।
दवा व्यवसायियों का कहना है कि ई-फार्मेसी और इंटरनेट के माध्यम से बड़े पैमाने पर हो रही ऑनलाइन दवा
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| जयकुमार भगत |
बिक्री से पारंपरिक मेडिकल स्टोरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उनका आरोप है कि बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट देकर दवाओं की बिक्री कर रहे हैं, जिससे बाजार का संतुलन बिगड़ रहा है और छोटे दवा विक्रेताओं के रोजगार पर संकट गहरा रहा है।
मुरलीगंज मेडिकल शॉप संगठन के अध्यक्ष जयकुमार भगत ने बताया कि आपातकालीन स्थितियों को छोड़कर आम दिनों की तरह दवाएं उपलब्ध नहीं हो सकीं। उन्होंने कहा कि दवा व्यवसायियों की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार ई-फार्मेसी और ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन के जरिए होने वाली दवाओं की बिक्री एवं सप्लाई पर सख्त नियम और कानून लागू करे, ताकि छोटे व्यवसायियों के हितों की रक्षा हो सके।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
May 20, 2026
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