अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार झा ने विश्व पर्यावरण दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अधिकाधिक वृक्षारोपण करने तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों को एक-एक पौधा भेंट कर सम्मानित भी किया।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित महाविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) अनंत कुमार ने कहा कि ‘पर्यावरण’ शब्द ‘परी’ और ‘आवरण’ से मिलकर बना है। प्रकृति ने मानव जीवन की सुरक्षा के लिए जो आवरण प्रदान किया है, उसे बीते कई दशकों से मानव समुदाय द्वारा लगातार क्षति पहुंचाई जा रही है। इसका परिणाम जलवायु असंतुलन, अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है।
महाविद्यालय के संस्थापक शिक्षक प्रो. नगेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि महाविद्यालय की स्थापना काल से ही परिसर में वृक्षारोपण की परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सामाजिक एवं धार्मिक स्थलों पर सैकड़ों अशोक के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में वृक्षों का विशेष महत्व है और पीपल, वटवृक्ष सहित अनेक पेड़ों की पूजा की परंपरा प्रकृति संरक्षण की हमारी प्राचीन चेतना का प्रतीक है।
पूर्व मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. जनार्दन प्रसाद यादव ने कहा कि “बर्थ राइट, अर्थ राइट” अभियान के तहत प्रत्येक व्यक्ति को अपने जन्मदिन पर कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। इससे पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप दिया जा सकता है।
पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रामदेव प्रसाद यादव ने प्रकृति और मानव जीवन के अटूट संबंधों पर प्रकाश डालते हुए भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया—
“हम कौन थे, क्या हो गए हैं और क्या होंगे अभी,
आओ विचारें आज मिलकर ये समस्याएं सभी।”
उन्होंने कहा कि आत्ममंथन और जागरूकता के माध्यम से ही पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान संभव है।
कार्यक्रम के समापन सत्र में मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. महेंद्र मंडल ने मैथिली भाषा में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि “यदि पर्यावरण सुरक्षित नहीं रहेगा तो मानव अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का संकल्प बनाना होगा।”
इसके उपरांत महाविद्यालय परिसर में सेवानिवृत्त एवं वर्तमान शिक्षकों तथा शिक्षकेत्तर कर्मियों द्वारा फलदार एवं मानव उपयोगी वृक्षों का सामूहिक वृक्षारोपण किया गया।
इस अवसर पर प्रो. मोनी कुमारी, डॉ. पूनम कुमारी, डॉ. राघवेंद्र कुमार, डॉ. दीपक कुमार, कार्यालय सहायक राजन कुमार, लेखपाल देवाशीष देव, नीरज कुमार निराला, नीरज कुमार, अभिमन्यु कुमार, प्रमोद कुमार सहित महाविद्यालय परिवार के अनेक सदस्य उपस्थित थे।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
June 05, 2026
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