उन्होंने कहा कि UMIS एक एजेंसी के रूप में विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का आर्थिक रूप से दोहन और शोषण कर रहा है। छात्र-छात्राओं को कई स्तरों पर शुल्क वहां भरना पड़ रहा है। वर्ष 2026 में अगर UMIS के द्वारा नामांकन होता है तो विद्यार्थी परिषद इसका पुरजोर विरोध करेगी। 2026 में भारत सरकार के समर्थ पोर्टल के द्वारा नामांकन की प्रक्रिया की जाए जो पूरी तरह से नि:शुल्क है। अगर समर्थ पोर्टल को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन गंभीर नहीं होती है तो यह समझ जाएगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन भी इस भ्रष्टाचार में लिप्त है और जानबूझकर निजी एजेंसी के हाथों छात्र - छात्राओं की भविष्य को गिरवी रखने का काम किया जा रहा है। UMIS के साथ साथ पूरे विश्वविद्यालय के सभी अंगीभूत एवं संबद्धता प्राप्त महाविद्यालय में यश इन्फोटेक के नाम से दूसरी एजेंसी भी कार्यरत है जो अवैध उगाही करके छात्रों का दो बार आर्थिक शोषण कर रही है। दो-दो एजेंसी मनमाने तरीके से कार्य कर रही है जबकि उक्त इन्फोटेक के लिए किसी प्रकार का कोई भी टेंडर नहीं किया गया ना ही सीमित या सिंडिकेट से किसी एजेंसी को महाविद्यालय में रखने के लिए अनुमति ली गई ऐसे में प्राचार्य से लेकर सभी बिचोलिया छात्र-छात्राओं का आर्थिक शोषण और दोहन कर रहे हैं।
वहीं जिला संयोजक नवनीत सम्राट ने कहा कि वर्तमान समय में कुलपति के क्रियाकलापों से कोई भी अधिकारी खुश नहीं है , जिसके कारण उनके कार्यकाल में दो-दो परीक्षा नियंत्रक दो-दो कुलसचिव ने अपने पद पर रहते हुए इस्तीफा दे दिया और दो-दो बार इन्हें पैनल बनाकर भेजना पड़ा फिर जाकर राजभवन के द्वारा नियुक्ति की गई। इसे यह स्पष्ट होता है उनके क्रियाकलापों से कोई भी व्यक्ति प्रसन्न नहीं है , वर्तमान कुलपति ने विश्वविद्यालय में एक व्यक्ति को कई पदों पर बिठाकर रखा हुआ है और कुछ व्यक्ति को भ्रष्टाचार करने के लिए खुली छूट दे दी है।
मौके पर सूरज कुमार, मिलन, शिल्पी, पूजा, राजेश, नीतीश, बबलू, विवेक, सुमन, मोनिका, रुपा, माही,मधु, साक्षी,आदित्य आदि उपस्थित रहे।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
March 30, 2026
Rating:

No comments: