दर्द बांटने वाले कम मिलेंगे..//रचना भारतीय

जिन्दगी की राह में जब गम मिलेंगे ..
हर तरफ निराशाओं के मौसम मिलेंगे |

इस शहर में दोस्तों की बात मत कर.........
हर कदम पर इस जगह दुश्मन मिलेंगे |

संवेदनाएं आदमी की मर चुकी हैं ..............
एक से बढ़ कर एक बेरहम मिलेंगे |

अपने जख्म न कहना किसी से भूलकर भी ......
दर्द बाँटने वाले बहुत कम मिलेंगे |

जब इंसानियत की इस कदर बेईज्ज़ती हो .........
तो हैवानियत के किस्से ही हरदम मिलेंगे |

लोग जब समझने लगे ताक़त की ही भाषा.........
फिर कैसे हमे शांति के उपवन मिलेंगे |


--रचना भारतीय, मधेपुरा
दर्द बांटने वाले कम मिलेंगे..//रचना भारतीय दर्द बांटने वाले कम मिलेंगे..//रचना भारतीय Reviewed by मधेपुरा टाइम्स on July 08, 2012 Rating: 5

6 comments:

  1. Well-Written, Rachna Ji. .
    Superb Poem. . .

    ReplyDelete
  2. रचना जी , जिन्दगी में जब कोई गम मिलता है तो आदमी को मूर्क्षित नहीं होना चाहिये आदमी को डटकर के उसका मुकाबला करना चाहिये इससे ही वो पहले से ज्यादा मजबूत होकर के उभरेगा ! सवेदना तो बहुत है आज भी आदमी में पहले तो आजमा कर देखो ! अगर दुश्मन नहीं मिलेंगे जिन्दगी में तो आप लरने की विधि केसे जानोगे ! और अगर बेरहम नहीं होगा लोग इस दुनिया में तो अशुर का नाश केसे होगा ! और अगर किसी का इंसानियत देखना चाहते है तो पहले इन्सान खुद बन कर के देखो !

    ReplyDelete
  3. बहुत ही खुबसूरत और प्यारी रचना...

    ReplyDelete
  4. Aapki tarah sunder , sach ,najuk aur kathor kavita. Wah rachna jee.

    ReplyDelete
  5. Bahut khoob likha hai aapne, nice one......

    ReplyDelete
  6. bahut khoob likha hai aapne, nice one....

    ReplyDelete

Powered by Blogger.