16 मई 2017

वार्ड नं. 19: त्रिकोणीय कम, दिग्गजों में सीधी टक्कर अधिक दिख रहा वार्ड में

मधेपुरा नगर परिषद् चुनाव होने में महज सप्ताह भर से भी कम समय बचे हैं और प्रत्याशी समेत वोटरों का भी कहना है कि अब उलटी गिनती शुरू है और पता चल जाएगा कि किनके दावों में कितना दम है.

मधेपुरा नगर परिषद् क्षेत्र के वार्ड नं. 19 (शास्त्रीनगर) की बात करें तो शहर के करीब मध्य में बसे इस वार्ड में कुल मतदाताओं की संख्यां 1146 है और इस बार के चुनाव में यहाँ से कुल पांच महिला प्रत्याशी मैदान में हैं, चूंकि वार्ड महिला सीट के लिए आरक्षित हो गया है. वार्ड के विषय में यहाँ के लोग जानकारी देते हुए बताते हैं कि वार्ड वर्ष 2002 में बना था और पहले चुनाव में संदीप गुड्डू वार्ड पार्षद चुने गए थे. वर्ष 2007 में अशोक दास वार्ड पार्षद बने थे तो वर्ष 2012 में दीपक कुमार बासुकी ने निकटतम प्रतिद्वंदी राज किशोर कामती को कराया था. वर्ष 2014 में वार्ड में उप-चुनाव हुए तो फिर दीपक बासुकी ही जीते थे, पर दीपक बासुकी की बीमारी की वजह से असामयिक मृत्यु होने के बाद 2015 में उनकी पत्नी बनीता देवी को वार्ड की जनता ने वार्ड पार्षद चुना था जो वार्ड की निवर्तमान वार्ड पार्षद भी हैं.

इस बार मैदान में निवर्तमान वार्ड पार्षद बनीता देवी, कंचन कुमारी (पति- संदीप गुड्डू), सुधा देवी (पति- स्व० विनोद यादव), त्रिफूल देवी (पति- राज किशोर कामती) तथा कविता कुमारी (पति- मनोरंजन कुमार) मैदान में हैं.

बनीता देवी से जब हमने पिछले पांच साल की उपलब्धियों का ब्यौरा माँगा तो प्रतिनिधि के रूप में बनीता देवी के पुत्र प्रकाश कुमार ने कहा कि पापा के समय के काम के बारे में वे नहीं बता सकते. पिछले दो सालों के बारे में वे कहते हैं कि हमने विकास के लिए पूरा प्रयास किया और जो काम बचे हैं, यदि इसबार मौका मिला बचे काम भी करवा लेंगे. नालों और नियमित सफाई के लिए हमने हमेशा प्रयास किया. जल निकासी की समस्या वार्ड में नहीं है. 33 आवास योजना, 25 शौचालय, छ: रोड, जिसमें तीन नगर परिषद् से और तीन सांसद योजना से वार्ड को दिया गया. जरूरतमंदों को राशन कार्ड भी दिए गए हैं.

चुनावी मैदान में प्रत्याशी के रूप में कंचन कुमारी वार्ड में कई कमियां गिनवाती हैं. कहती हैं कि जल निकासी सबसे बड़ी समस्या है, हलकी बारिश में भी मोहल्ले में घुटने भर पानी जमा हो जाता है. नाला तो बना हुआ है पर उसकी कोई देखरेख नहीं होती है. स्ट्रीट लाईट की भी देखरेख नहीं होती है, दिन में जलता है, रात में बंद रहता है. सरकारी योजना का लाभ वार्ड में जरूरतमंदों को नहीं मिला है और जिनको नहीं मिलना चाहिए उन्हें मिल रहा है. आवास योजना के तहत एक भी घर नहीं बना है. कहती है कि उनके पति भी इस वार्ड के पार्षद रह चुके हैं और उस समय काम अच्छा हुआ था. नाले की निकासी मुख्य नाले और उसकी निकासी नदी तक करने की जरूरत है. निवर्तमान के काम से कंचन कुमारी पूरी तरह असंतुष्ट हैं और कहती है कि वार्ड पार्षद बोल्ड होना चाहिए जो अपने बल पर फंड लाने में सक्षम होनी चाहिए.

प्रत्याशी सुधा देवी के प्रतिनिधि के तौर पर जदयू नेत्री मंजू देवी भी वार्ड में कई खामियां गिनवाती हैं. कहती हैं कि पिछले पांच साल में विकास का कोई काम इस वार्ड में नहीं हुआ है. न नाला समेत रोड है, न कचरा साफ़ करने की कोई व्यवस्था है, न लाइटिंग की व्यवस्था है. सबसे बड़ी बात तो यहाँ आवास योजना का लाभ किसी को नहीं मिला है. मंजू देवी कहती हैं कि ग़रीबों को आवास योजना के लाभ के साथ साफ़-सफाई और नाला समेत रोड बनना बहुत ही आवश्यक है. जबकि प्रत्याशी सुधा देवी कहती हैं कि उनके स्वर्गीय पति भी समाज सेवी रह चुके हैं. यहाँ लाचार और ग़रीबों को सबसे पहले योजनाओं का लाभ मिलना अत्यंत आवश्यक है और योजनाओं में घूसखोरी को भी रोकना बहुत जरूरी है.

चुनावी मैदान में खड़े अन्य प्रत्याशी के भी अपने-अपने दावे और अनुभव हैं. पर वार्ड की जनता को यहाँ भी समझना मुश्किल है. वार्ड की कमियों को तो अधिकांश गिनाते हैं, पर प्रत्याशी के नाम पर मुस्कुरा कर रह जाते हैं. हालाँकि कई लोगों का मानना है कि यहाँ दो प्रत्याशियों में सीधी टक्कर का माहौल बन रहा है और 23 मई को मतगणना के बाद सबकुछ दिख जाएगा.
(सुनिए इस वीडियो में क्या कहते हैं निवर्तमान और प्रत्याशी, यहाँ क्लिक करें)

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