01 मई 2017

स्पेशल रिपोर्ट: इन ‘पतियों’ के चरित्र पर टिका है मधेपुरा का भविष्य!

मधेपुरा नगर निकाय चुनाव में कई नए उम्मीदवारों का हुजूम दम-ख़म दिखाने की तैयारी में आ तो गए हैं, पर मतदाता इस बार पहले से अधिक संशय में हो सकते हैं.

मधेपुरा नगर परिषद् में कुल 26 वार्ड हैं और इनमें से 12 इस बार पूरी तरह से महिलाओं के लिए सुरक्षित हो गए हैं, जिनमें वार्ड नं. 1, 2, 4, 13, 14, 15, 16, 18, 19, 20, 21 तथा 26 शामिल है. हालाँकि दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी वार्ड हैं जहाँ का प्रतिनिधित्वपिछली बार महिलाएं कर रही थी, पर इस बार वार्ड सामान्य या अन्य तरह से आरक्षित हो जाने के कारण या तो वे दौड़ से बाहर हो गई हैं या फिर कमान इस बार पति के हाथों चली गई है. वैसे कुछ जगह पति के हाथ से भी कमान खिसककर पत्नियों ने पत्नियों के हाथ में है.
    महिलाओं के लिए सुरक्षित अधिकांश वार्ड में जमकर उम्मीदवारी दर्ज कराई गई है. हैरत की बात तो ये है कि इनमें से अधिकाँश महिला उम्मीदवार महज ‘रबर स्टाम्प’ हैं. कुछ को न तो नगर परिषद् की संरचना और कार्य का पता है और न ही इनके पास विकास की समझ है. अधिकांशत:
पतियों के भरोसे ही पूरी तरह चलने का मन बना चुकी हैं. कई उम्मीदवार तो वार्ड के किसी भी मुद्दे पर छोटी बहस करने में भी सक्षम प्रतीत नहीं होती हैं. जाहिर है, इनके पीछे-पीछे इनके पतियों को ही हर जगह रहना होगा और ख़ास कर तुरंत निर्णय लेकर हस्ताक्षर करने जैसे मामलों में इन्हें कुछ अधिक ही परेशानी महसूस होगी.
    उधर सम्बंधित वार्ड के मतदाताओं को उम्मीदवार महिला के ‘अक्षम’ होने की स्थिति में उनके पति, पुत्र या कोई अन्य (जो स्पष्ट रूप से पता होता है) के ‘चरित्र’ को देखकर ही निर्णय लेना होगा. भरोसा करने और निर्णय लेने में पतियों के ‘बैकग्राउंड’ की भूमिका अहम् होगी और यह भी देखना जरूरी है कि ये पति कितने कर्मठ होने के साथ-साथ कितने लालची और बिकाऊ हैं. नगर के विकास के प्रति चिंतित मतदाताओं को ये समझना होगा कि इन ‘पतियों’ के चरित्र पर टिका है मधेपुरा का भविष्य!
(वि. सं.)

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