19 मई 2017

मुरलीगंज नगर पंचायत चुनाव 2017: अंतिम दौर में प्रत्याशियों ने लगाया जोर

मुरलीगंज नगर पंचायत चुनाव में शाम को जैसे ही सूर्य का तापमान ढलने लगता है, तब मुरलीगंज नगर निकाय में चुनावी सरगर्मी बढ़ती जाती है। पर अब प्रचार भी अंतिम दौर में है.

यहां दिन में तो न कोई चुनावी शोरशराबा ही सुनाई देता है और और न ही उम्मीदवार दौड़ धूप करते नजर आते हैं । जब दिन ढलने लगता है तब चुनावी शोरशराबा और उम्मीदवारों एवं उनके समर्थको हाथों में चुनाव चिन्ह  के पंपलेट लेकर माहौल की हलचल को तेज़ कर देते हैं। सभी वार्डो के उम्मीदवार अपने अपने वार्डो के मतदाताओं को लुभाने में जी तोड़ मेहनत करने में लगे हुए हैं , लेकिन इस बार मुरलीगंज की जनता ने भी अपनी कमर कस ली है और अपना अपना प्रतिनिधि मन ही मन चुन लिया है।

ऐसा बताया जाता है कि जनता अब बदलाव  चाह रही है और परिवर्तन के लिए अपना अपना विकल्प भी ढूंढ रही  है कि किसको चुने जो हमारी सुनेगा और नगर पंचायत की विकास करेगा। मस्जिद चौक पर एक बुजुर्ग ने बताया कि जनता उम्मीदवार को नहीं खरीदती है बल्कि जनता खुद उम्मीदवार के हाथों बिकने के लिए तैयार रहती है.  सब विकास की बात करते है, समझ मे नही आता कि किसका चयन किया जाए. नगर पंचायत में विकास क्या हुआ और निवर्तमान पार्षदों के बारे में उन्होंने व्यंग करते हुए कहा कि विकास तो काफी हुआ है, लगभग सभी वार्ड में जलजमाव की समस्या ही क्या हर समस्या अपने स्थान पर यथावत है उसमें कोई भी बदलाव नहीं हुआ है. दुर्गा स्थान चौक के सामने इशारा करते हुए कहा यहां पर ही है नगर पंचायत के विकास की गंगा जिससे देखने के लिए बहुत से श्रद्धालु नंगे पांव आते हैं और आशीर्वाद के तौर पर नगर पंचायत के क्रियाकलाप पर कुछ बोलते हुए अवश्य चले जाते हैं. वही बगल में बैठे  एक युवक ने बताया कि जल जमाव की समस्या यहाँ ही नही बल्कि पूरे नगर पंचायत के विभिन्न वार्डो में है । सडको पर नाले का गंदा पानी जमा रहता है आसपास के दुकानदारों और आम लोगो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 5 वर्षों में विकास का कोई भी काम हुआ हो तो मुझे  वह आकर बतला दे. शौचालय निर्माण की बात हो या नाले निर्माण की या फिर डोर टू डोर स्वक्षता अभियान की ज्यादातर योजनाएं धरातल पर सफल नही हो पाई। वहीँ मुरलीगंज झील चौक निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि विकास तो हुआ है लेकिन जितना होना चाहिए उतना तो नही हुआ है । इस बार जनता ने  सब को मौका दिया है अब नए चेहरे की तलाश में है। सबसे सोचनीय पहलू यह है कि कि बस स्टैंड अपने अस्तित्व में अब तक नहीं आया। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार प्रत्याशियों के पास कोई नया एजेंडा भी नही देखने को मिल रही है , उम्मीदवारों को इस बार चुनाव में कोई विशेष चुनावी एजेंसी के साथ मतदाताओं से संपर्क करते हुए नहीं देखा गया और वो अपना प्रतिनिधि खुल कर चुनते है। इस बार युवाओ और महिलाओ में खास चुनावी उत्साह देखने को मिल रहे है।

वैसे अब प्रचार का अंत समय आ गया है और अंत में देखना है कि लोग क्या निष्कर्ष निकालते हैं और क्या चुनते हैं. नगर पंचायत की सरकार बदलती है या नही तथा कौन पार्षद जीतता है और कौन हारता है?

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