उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय ने मनमाने तरीके से प्रधानाचार्यों के हक-अधिकार का हनन किया है। इसका विभिन्न महाविद्यालयों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसलिए नवनियुक्त प्रधानाचार्यों के खाता संचालन संबंधी पत्र में संशोधन करते हुए प्रतिमाह अधिकतम एक लाख रुपए खर्च करने की बंदिश हटाई जाए।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का यह प्रावधान भेदभावपूर्ण है। नवनियुक्त प्रधानाचार्यों के लिए प्रतिमाह एक लाख खर्च करने की बंदिश है, लेकिन पूर्व में नियुक्त प्रधानाचार्यों एवं प्रभारी प्रधानाचार्यों के लिए कोई बंदिश नहीं है। यह संविधान प्रदत्त समानता के मौलिक अधिकारों के भी खिलाफ है।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
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April 06, 2026
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