वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राज्य कार्य विश्वविद्यालय प्रमुख सौरभ यादव ने कहा कि वर्ष 2026 से राजभवन के द्वारा स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किया जा चुका है कि सभी प्रकार के नामांकन समर्थ पोर्टल के माध्यम से लिया जाना सुनिश्चित किया जाए लेकिन बावजूद इसके मंडल विश्वविद्यालय बिहार का इकलौता विश्वविद्यालय है जहां दो-दो एजेंसी इस काम को कर रही है. एक यस इन्फोटेक के नाम से सभी महाविद्यालय में लूट मचाई हुई है और छात्र-छात्राओं का आर्थिक शोषण व दोहन कर रही है। वहीं UMIS भी छात्रों का एक बार शुल्क लेती है तो दूसरी बार यस इन्फोटेक नमक एजेंसी महाविद्यालय में लेती है. इस प्रकार छात्राओं का दो-दो बार आर्थिक शोषण और दोहन माननीय कुलपति के नाक के नीचे हो रहा है और वह इस भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं और चुपचाप तमाशा देख रहे हैं।
वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक नवनीत सम्राट ने कहा कि वर्तमान कुलपति के क्रियाकलाप संदेह के घेरे में इसलिए लगने लगी है क्योंकि वह जिस प्रकार से UMIS को बचाने के लिए और इस प्रकार के भ्रष्टाचारी एजेंसियों को बचाने के लिए अधिकारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करके इस्तीफा देने के लिए बाधित कर रहे हैं इससे स्पष्ट होता है कि वह भी इस प्रकार के भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं। वहीं मेघा मिश्रा ने कहा कि माननीय कुलपति महोदय को मिलकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अविलंब ज्ञापन देगी और उनका ध्यान राजभवन के दिशा निर्देशों के तरफ आकृष्ट कराएगी। उन्होंने कई पदों पर दो-दो व्यक्ति को बिठा कर राजभवन के नियमों की धज्जियां उड़ाई हुई है। विद्यार्थी परिषद कई बार अपने ज्ञापन के माध्यम से इन सभी मुद्दों को उठाते आ रही है लेकिन वर्तमान कुलपति इन लोगों को भ्रष्टाचार करने के लिए छूट दी हुई है । ऐसी स्थिति में यह कहने में कोई अतिशक्ति नहीं होगी कि वर्तमान कुलपति ही इस प्रकार के भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए उनके संरक्षक के रूप में मंडल विश्वविद्यालय में बैठे हुए हैं।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
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April 02, 2026
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