चित्रकला के क्षेत्र में आज इनका बड़ा नाम है। इनकी रचनाओं में सम्पन्न परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों की समृद्धि दिखती है। वाटर कलर, ऑयल पेंट, पेंसिल स्केच जैसे सभी माध्यमों में प्रज्ञा कार्यकुशलता से काम करती हैं। अनेक मंचों पर इनकी चित्रकला को सराहा जा गया है।
प्रज्ञा आए दिन जिला प्रशासन एवं कला संस्कृति विभाग के कार्यक्रम में सक्रिय रहती हैं। SVEEP (व्यवस्थित मतदाता शिक्षा और चुनावी भागीदारी) भारत निर्वाचन आयोग का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य मतदाताओं की शिक्षा और चुनाव में भागीदारी को बढ़ावा देना है। चित्रकला के द्वारा इस अभियान में प्रज्ञा ने बढ़ चढ़कर अपनी भूमिका निभाई है। जिले के जिलाधिकारी सहित सभी उच्चाधिकारी इनकी कला के प्रशंसक हैं।
स्थानीय सामाजिक संस्थाओं की गतिविधियों में भी बराबर अपनी भूमिका निभाती रहती हैं। स्थानीय स्तर पर इनके पेंटिंग की प्रदर्शनी देखकर लोगों की सराहना मिलती रही है। इनकी पेंटिंग बिहार म्यूजियम, पटना और ललित कला अकादमी के प्रदर्शनी में भी प्रदर्शित हो चुकी हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल वाटर कलर सोसाइटी के शिलौंग तथा दिल्ली की प्रदर्शनी में भी इनके पेंटिंग का प्रदर्शन हो चुका है।

ये सहरसा के एक बड़े दवा कारोबारी परिवार की बहू हैं। इनके ससुर श्री चक्रवर्ती केशरी का केशरी मेडिकल एजेंसी नाम से बहुत पुराना और स्थापित कारोबार है तथा सामाजिक स्तर पर एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं। इनके पति श्री रीतेश कुमार आत्मा (ATMA - Agricultural Technology Management Agency) में सहायक तकनीकी प्रबंधक हैं।
फिर भी, चित्रकारी के अपने शौक के लिए कैसे समय निकाल पाती है प्रज्ञा रंजन? इस हैरान कर देने वाले सवाल के पूछने पर बताती हैं कि पेंटिंग करके ही अपनी थकान मिटा पाती हूँ। प्रतिदिन पेंटिंग करना इनके लिए प्राणवायु भरने जैसा है।
एक कलाकार, एक कला संकाय की शिक्षिका, बड़े परिवार की बहू और दो बच्चों की माँ के रूप में प्रज्ञा रंजन की भूमिका प्रशंसनीय है।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
March 22, 2026
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