कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रधानाचार्य प्रो. कैलाश प्रसाद यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं के आदर्श और प्रेरणास्रोत हैं। युवाओं को उनके विचारों को आत्मसात कर उसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए आगे आना चाहिए। उनकी गौरवगाथा को जगह-जगह सुनाया जाना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि अर्थपाल डॉ. रत्नदीप ने कहा कि विवेकानंद के संदेश सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, और राजनैतिक क्षेत्र में भी प्रासंगिक हैं। उनके विचारों पर चलकर ही संपूर्ण मानवता का कल्याण हो सकता है।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता विभाग प्रमुख प्रो. ललन प्रसाद अद्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारत एवं भारतीयता के पर्याय हैं। भारत को जानने- समझने के लिए उनके विचारों को आत्मसात करना आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रांत उपाध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि विवेकानंद ने व्यक्ति-निर्माण के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण का आदर्श प्रस्तुत किया है। वे युवाओं को शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक सभी दृष्टियों से सशक्त बनाकर उनके माध्यम से राष्ट्र का उत्थान करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने युवाओं को अपने अंदर छिपी असीमित शक्ति को जगाने और उस शक्ति को जन-कल्याण में लगाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी उपस्थित लोगों ने स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर विशेष रूप से युवाओं की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई और समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में उनके योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का स्वागत एनसीसी पदाधिकारी ले. गुड्डु कुमार ने किया। विषय प्रवेश प्रांत शोध सह-प्रमुख सह असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रंजन यादव ने कराया। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय कार्य संयोजक सौरभ यादव ने किया और धन्यवाद ज्ञापन जिला संयोजक नवनीत सम्राट ने किया।
इस अवसर पर नगर मंत्री अंकित आनंद, प्रदेश कार्यकारणी सदस्य संजीव सोनू, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गौरव कुमार चौधरी, शोधार्थी डॉ. सौरभ कुमार चौहान, आलोक कुमार, अंकित कुमार, आदित्य रमण, खुशी कुमारी, रामनरेश कुमार , सत्यम कुमार, शिवम राज, आशीष कुमार, हिमांशु कुमार, गौरव कुमार, काजल कुमारी, बंटी कुमारी, कृष्णा कुमार सहित दर्जनों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
January 19, 2026
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