इस मौके पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राज्य कार्य विश्वविद्यालय प्रमुख सौरव यादव ने कहा कि बहुत सारे विषयों के विभागाध्यक्ष एवं आर्थिक तंगी के वजह से ससमय प्लेग्रिज्म में नहीं हो पाया। जिस वजह से बहुत सारे छात्रों का मौखिक नहीं हो पाया । विभागों के मनमानी और लापरवाही से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा कुछ दिन पूर्व ऐसे छात्रों का पंजीयन को निरस्त करने का आदेश दिया गया जिनका शोध कार्य विभागों के लापरवाही से बढ़ गया। इस परिस्थिति में बहुत सारे कोशी के गरीब छात्र शोध कार्य से वंचित रह गए हैं, यहां तक कि PAT 2016 का रेगुलेशन के अनुसार महिलाओं को 2 वर्ष अधिकतम विस्तारित अवधि देने का योजना है, इसे अभी अनदेखी करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरी तरीका से छात्र-छात्राओं को भी यह लाभ देने से वंचित कर उनका शोध कार्य रोक दिया।
वही प्रांत एसएफएस संयोजक आमोद आनंद ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई भी अधिसूचना जारी करने से पहले एक बार रेगुलेशन का अध्ययन करना चाहिए। रेगुलेशन को ताक पर रखकर इस प्रकार से अधिसूचना जारी करना कहीं से भी उचित नहीं है बल्कि यह विश्वविद्यालय प्रशासन का तानाशाही रवैया को दर्शाता है। उन्होंने कुलपति से आग्रह किया है कि यथा शीघ्र शुद्ध कार्य हेतु समय अवधि को विस्तारित किया जाए।
ABVP की मांग पर PAT 2019 के छात्रों के शोध कार्य अवधि विस्तारित कर दी गई.
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
January 19, 2026
Rating:

No comments: