|वि० सं०|20 दिसंबर 2013|
मधेपुरा टाइम्स के डीडीसी स्टिंग वीडियो पर सिर्फ
मधेपुरा ही नहीं, बल्कि मधेपुरा के पूर्व डीडीसी श्रवण कुमार पंसारी के वर्तमान
पदस्थापन की जगह मुजफ्फरपुर समेत पूरा बिहार स्तब्ध है. अधिकारी की शर्मनाक हरकत
पर सत्ताधारी दल और विपक्षी समेत सेंसिटिव आम लोग भी थू-थू कर रहे हैं.
मधेपुरा
बाबा भोले की नगरी है. यहाँ किये गए पाप का हिसाब भोले निश्चित रूप से लेते हैं.
यहाँ यदि किसी व्यक्ति को जनता की सेवा करने का कोई पद या भार दिया जाता है और वह
व्यक्ति अपने कर्तव्य निर्वहन की जगह लूट और अय्यासी में डूबा रहता है तो उसे सजा
भी जल्द ही मिलती है. मधेपुरा के और भी कुछ बड़े अधिकारियों ने बाबा की नगरी में
पाप किये तो किसी का प्रोमोशन रूका, तो किसी पर बड़ी कार्यवाही हुई. यदि अबतक वे बचे हैं तो शिवभक्तों के अनुसार यकीन मानिए हिसाब जल्द होगा.
कहते
हैं कि व्यक्ति मृत्यु से पूर्व झूठ नहीं बोलता. याद कीजिए 22 मार्च 2012 का वो
दिन जो दो मायने में महत्वपूर्ण था. एक तरफ बिहार की स्थापना दिवस का कार्यक्रम
मधेपुरा के बी.एन.मंडल स्टेडियम में दिन में मनाया गया तो उसी रात मधेपुरा के
प्रसिद्ध समाजसेवी रामानंद प्रसाद मंडल उर्फ झल्लू बाबू ने अंतिम साँसे ली थी. पर
दिन में स्टेडियम के खुले मंच से झल्लू बाबू ने साफ़ तौर पर कहा था कि जो मधेपुरा
के विकास में बाधा बनेगा उसे बाबा सिंहेश्वर कभी माफ नहीं करेंगे. सुनें झल्लू
बाबू का अंतिम भाषण जिसे सिर्फ मधेपुरा टाइम्स के कैमरे ने रिकॉर्ड किया था, यहाँ क्लिक करें.
बाद की
परिस्थितियों में ऐसा ही लगा कि स्व० झल्लू बाबू की बातों को एक कान से सुनकर
दूसरे कान से निकाल देने वाले अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर शंकर के त्रिनेत्र
का कहर बरपना शुरू हो गया है.
बाबा की नगरी से खुला शंकर का त्रिनेत्र?: भ्रष्ट अधिकारी हो रहे स्वाहा
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
December 20, 2013
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