24 अगस्त 2017

चन्द्रकिरण रीना: सधी और सुरीली आवाज पहुंचा रही है शोहरत की बुलंदियों पर

प्रतिभा संपन्न कोसी की उर्वरा धरती से रह-रहकर ऐसी प्रतिभाएं उभरती है जो न सिर्फ खुद लोगों का प्यार और सम्मान पाती हैं बल्कि कोसी की धरती की रचनात्मकता भी दर्शाती रहती है.

सुरों की दुनियाँ में ऐसी ही एक प्रतिभा चन्द्रकिरण रीना हैं, जिनकी गायकी के लाखों प्रशंसक मौजूद हैं. शास्त्रीय संगीत पर अद्भुत पकड़ रखने वाली रीना ने जब अपने गानों की प्रस्तुति मधेपुरा टाइम्स स्टूडियो में दी और हमने इसे फेसबुक पर लाइव किया तो इलाके समेत सरहद पार से भी रीना की गायकी को लोगों से जमकर सराहा. किसी ने इन्हें कोसी की शान कहा तो कई ने इस बेहतरीन आवाज की अन्य शब्दों में तारीफ की और रूह को सुकून देने वाला बताया. मधेपुरा और कोसी के इलाके में सुरों की शाम चन्द्रकिरण रीना संगीत जानने और समझने वालों के बीच परिचय की मुहताज नहीं हैं.

जानें विस्तार से चन्द्रकिरण रीना को: चन्द्रकिरण रीना का जन्म 03 सितम्बर 1988 को सहरसा जिले के बैजनाथपुर के गम्हरिया गाँव में हुआ था. पिता तारणी प्रसाद यादव (अब स्वर्गीय) के लाड़-प्यार में प्राथमिक शिक्षा गाँव के ही प्राथमिक विद्यालय में हुई और मैट्रिक इन्होने मनोहर हाई स्कूल बैजनाथपुर से करने के बाद इंटर और ग्रैजुएशन क्रमश: आरपीएम कॉलेज मधेपुरा और आदर्श कॉलेज घैलाढ़, मधेपुरा से की. छठी कक्षा से ही स्कूल के मंचों पर अपनी आवाज से लोगों को सम्मोहित कर रही रीना का संगीत में रूझान बचपन से रहा तो रीना ने संगीत में डिग्री भी लेना उचित समझा और पटना के मगध महिला कॉलेज से इन्होने वर्ष 2015 में संगीत से न सिर्फ मास्टर और आर्ट्स की डिग्री हासिल की बल्कि प्रतिभा ने इन्हें गोल्ड मेडलिस्ट भी बनाया और एक भव्य समारोह में तत्कालीन राज्यपाल और वर्तमान राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद के हाथों सम्मानित हुई. इसके बाद चन्द्रकिरण रीना ने संगीत में भाष्कर की डिग्री प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ से हासिल कर संगीत की अराधना में दिन रात एक कर दिया.

मधेपुरा टाइम्स स्टूडियो में चन्द्रकिरण रीना ने कुल छ: गानों की प्रस्तुति दी, जिसका लाइव प्रसारण भी किया गया और लोगों ने जम कर तारीफ़ की. तबले पर संगत सहरसा के ही सज्जन कुमार रंजन दे रहे थे. ख़ास इंटरव्यू में रीना ने बताया कि उनके प्रथम गुरु डॉ. जवाहर लाल शर्मा, मधुरा (सहरसा) रहे. उसके बाद रजनीकांत झा रमण, मगध महिला कॉलेज की संगीत की विभागाध्यक्ष डॉ. नीरा चौधरी से बहुत कुछ सीखने को मिला. वर्ष 2016 में चन्द्रकिरण रीना ने मधेपुरा के पार्वती सायंस कॉलेज में शिक्षा शास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के रूप में अपना योगदान दिया और सम्प्रति वे यहीं पदस्थापित हैं.

सम्मानों की लगी झड़ी: कहते हैं सुरों में जब सरस्वती का वास होता है तो प्रतिभा की चमक चारों ओर बिखरने लगती है. चन्द्रकिरण रीना जब विभिन्न कार्यक्रमों का हिस्सा बनने लगी तो सम्मानों की मानो झड़ी लग गई. बिहार सरकार में लेखा पदाधिकारी पति नीलाम्बर कुमार का भी पूरा सहयोग मिला तो प्रतिभा और भी निखरती चली गई. मिथिलांचल नाट्य महोत्सव, आरटी राजन स्मृति युवा 2016, ईस्ट जोन यूथ फेस्टिवल पटना 2015, कोसी महोत्सव, उग्रतारा महोत्सव, बिहार दिवस, राज्य स्तरीय युवा महोत्सव, विद्यापति पर्व समारोह, पतंजलि द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में योग गुरु बाबा रामदेव के हाथों प्रथम पुरस्कार से सम्मानित होने के अलावे कई दर्जन मौकों पर चन्द्रकिरण रीना तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सम्मानित हुई. रीना अपने सम्मान और सफलता के पीछे विशेष आभार सहरसा के शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान और निदेशक बंदन वर्मा का देना नहीं भूलती है जिनके द्वारा आयोजित दर्जनों कार्यक्रमों में मिली ख्याति बुलंदियों को छूने में सहायक साबित हुई.

बेहद सुलझी और अत्यंत व्यवहारकुशल चन्द्रकिरण रीना कहती है कि संगीत में देवता का वास होता है और यही वजह है कि संगीत की प्रस्तुति के समय न सिर्फ गायक और गायिका इसमें डूब जाते हैं बल्कि अच्छा संगीत श्रोताओं को भी सुध-बुध खोने पर मजबूर कर देता है. संगीत मन को शान्ति देता है और हमेशा आपको जीवन में अच्छा करने को भी प्रेरित करता है. 

मधेपुरा टाइम्स की ओर से चन्द्रकिरण रीना को संगीत की बुलंदियों को छूने की हार्दिक शुभकामनाएं. मधेपुरा टाइम्स स्टूडियो में चन्द्रकिरण रीना के गाए गानों को आप नीचे के लिंक पर सुन सकते हैं.

1. किसी राह में किसी मोड़ पर, सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें. 
2. आज जाने की जिद न करो, सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें. 
3. लग जा गले कि फिर ये हसीं रात, सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें. 
4. स्वाभिमान हो सदा स्वदेश के लिए, सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें. 
5. छुप-छुप मीरा रोये दर्द न जाने कोई, सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें. 
6. मोरा ही रे अंगना विद्यापति गीत सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें. 

(प्रस्तुति: आर. के. सिंह)

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