यह सम्मान जाने-माने समाजसेवी और शिक्षाविद् प्रो॰ श्यामल किशोर यादव के हाथों प्रदान किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें रजत सम्मान पदक और शॉल भेंट किया गया। यह समारोह मधेपुरा के टी॰ पी॰ कॉलेज के स्मार्ट कक्ष में आयोजित हुआ, जिसमें शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही।
श्यामप्रिया सम्मान की स्थापना पिछले वर्ष टेंगराहा स्थित श्यामप्रिया सेंटर फ़ॉर सोशल हारमनी द्वारा की गई थी। यह सम्मान उन व्यक्तित्वों को समर्पित है जिन्होंने अपने जीवन को समाज में विविधता, समावेशन और सामाजिक न्याय के मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित किया है। संस्था का मानना है कि भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषिक विविधता तभी वास्तविक शक्ति बनती है जब उसे समरसता, समान अवसर और सहभागिता के मूल्यों के साथ जोड़ा जाए।
इस अवसर पर प्रो॰ श्यामल किशोर यादव ने कहा कि प्रो॰ सच्चिदानंद यादव बिहार में साक्षरता आंदोलन के अग्रणी चेहरों में से एक रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 के आसपास जब मधेपुरा जिले की साक्षरता दर लगभग तीस प्रतिशत के आसपास थी और बिहार देश के सबसे कम साक्षर राज्यों में गिना जाता था, तब प्रो॰ यादव ने साक्षरता को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा कि सरकार के राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के अंतर्गत वर्ष 1991 में मधेपुरा को टोटल लिटरेसी कैंपेन (संपूर्ण साक्षरता अभियान) के प्रथम प्रयोगात्मक जिलों में शामिल किया गया था। इस अभियान के संचालन और नेतृत्व में प्रो॰ सच्चिदानंद यादव की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उनके प्रयासों से गाँव-गाँव और घर-घर साक्षरता की अलख जगी तथा समाज के वंचित वर्गों में शिक्षा के प्रति नई चेतना का संचार हुआ। दीए से दीया जलाने की भावना के साथ यह अभियान धीरे-धीरे व्यापक सामाजिक आंदोलन में परिवर्तित हो गया। हजारों स्वयंसेवकों, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी से यह पहल पूरे बिहार में फैलती गई। बिहार ज्ञान विज्ञान समिति के माध्यम से इस आंदोलन को राज्य-स्तर पर भी नई दिशा मिली।
समारोह में वक्ताओं ने प्रो॰ यादव के कार्यों को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की उनकी दृष्टि आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। पूर्व कुलपति आर॰ के॰ पी॰ रमण ने कहा कि उन्होंने प्रो॰ सच्चिदानंद यादव को पहली बार तब देखा था जब वे आठवीं कक्षा में थे, और तभी से उनके जैसा बनने की प्रेरणा मिली। आगे चलकर वे उनके छात्र बने और बाद में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर, डीन, परीक्षा नियंत्रक तथा कुलपति के पदों तक पहुँचे।
सामाजिक कार्यकर्ता गणेश मानव ने कहा कि इस पिछड़े क्षेत्र में सच्चिदा बाबू और श्यामल बाबू ने साक्षरता का दीप जलाया। सत्यजीत यादव ने कहा कि जब विधि महाविद्यालय के खिलाफ साजिश की गई थी, तब सच्चिदा बाबू के मार्गदर्शन में सभी बाधाओं को दूर करने का अनुभव उन्हें मिला। प्रो॰ शचिन्द्र मेहता ने भी प्रो॰ श्यामल और प्रो॰ सच्चिदानंद के कार्यों की सराहना की। आलोक कुमार ने कहा कि भूपेन्द्र नारायण विचार मंच की स्थापना में भी प्रो॰ सच्चिदानंद का अतुल्य योगदान रहा है।
साक्षरता अभियान से जुड़े मुरलीधर ने अपने संस्मरण साझा करते हुए उस समय साक्षरता आंदोलन में गाया जाने वाला अभिनंदन गीत भी प्रस्तुत किया। कई अन्य महत्वपूर्ण लोगों ने इस अवसर पर अपना वक्तव्य दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ॰ हर्षबर्धन राठौड़ ने किया।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
March 07, 2026
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