“मैं स्वेच्छा से चार नवंबर की सुबह मैक्सी से अकेली गयी थी.बस स्टैंड में अपने ब्यॉयफ्रेंड अशोक को उसके मोबाइल पर फोन किया और बुलाया.मैंने उसे मुझे भगा लेने को कहा.अचानक बुलाने पर उसने मना किया तो मैंने ट्रेन से कटने की धमकी दी.मेरी धमकी सुनकर अशोक आया और फिर हम दोनों पटना चले गए.पटना से दिल्ली गए और वहां इण्डिया गेट के पास गोलचक्कर में सेक्टर-३७ में हमलोग एक कमरा लेकर रहे.फिर हमने वहीं शादी कर ली.जब घर मम्मी से बात की तो पता चला कि अशोक पर मुझे अपहरण करने का मुकदमा दर्ज हो गया है.जानकर मैं दिल्ली से यहाँ आ गयी.मेरा अपहरण नहीं हुआ है.ये केस झूठा है जज साहब ! मैं अपने पति अशोक यादव के साथ जाना चाहती हूँ.”
कुछ ऐसे ही बयान जब जिले के गम्हरिया थाना के फुलकाहा की विनीता ने न्यायालय में दिया तो इस मामले को जानने वालों ने सर पकड़ लिया.दरअसल विनीता और अशोक की प्रेम कहानी का सबसे मुश्किल पहलू ये है कि विनीता से पहले अशोक दो शादियाँ और कर चुका है.विनीता के पिता ने पुलिस में इसी आठ नवंबर को यह मुकदमा दर्ज कराया था कि रात में जब उसकी नाबालिग बेटी जिसकी उम्र सोलह वर्ष दो महीने है,अपनी छोटी बहन दस वर्षीया वंदना से साथ शौच के लिए बाहर गयी तो दो व्यक्ति मोटरसाइकिल से आये और थ्रीनट का भय दिखाकर विनीता को मोटरसायकिल पर बिठाकर अपहरण कर ले गए.छोटी बहन दौड़ कर आयी और घर में सारी बातें बताईं.पिता ने जब पता किया तो ये पता चला कि गाँव के ही चालीस वर्षीय अशोक यादव ने ही विनीता का गलत नीयत से अपहरण किया है.
पर आज न्यायालय में विनीता ने जो खुलासा किया, उसने पिता की पूरी कहानी की ही मिट्टी पलीद कर रख दी.विनीता ने कहा कि उसकी उम्र २१ वर्ष है और वह अशोक से बचपन से ही बेपनाह मुहब्बत करती थी.जिस समय अशोक की पहली शादी हुई उस समय वह नाबालिग थी.अब जब वह बालिग़ है तो उसने स्वेच्छा से अशोक के साथ रहना चाहती है.
देखा जाय तो अब जिले में प्रेम संबंधों ने हरेक बंधनों को तोड़ना शुरू कर दिया है.ऐसे में गजल सम्राट जगजीत सिंह के गजल की ये पंक्तियाँ अब यहाँ सटीक बैठने लगी है कि –
“ना उम्र की सीमा हो, न जन्म का हो बंधन,
जब प्यार करे कोई, तो देखे केवल मन.
नई रीत चला कर तुम, ये रीत अमर कर दो”
(मधेपुरा टाइम्स ब्यूरो)

2 टिप्पणी:
प्रेम कहानी में---
एक लड़का होता है , एक लड़की होती है
वो राजा होता है , वो रानी होती है
न किसी का चलता है, न किसी की चलती है
अपनी ही तो बस मर्जी होती है
जब जब प्यार पे पहरा हुआ है ,प्यार और भी गहरा हुआ है
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