उन्होंने बताया कि सरकार पंचायत प्रतिनिधिगण मुखिया, सरपंच, वार्डसदस्य, पंच, समिति सदस्य, जिप सदस्य एवं वार्ड पार्षद को अल्प मानदेय देती हैऔर इस मंहगाई के दौर में कई महीनों से उन्हें भुगतान नहीं कर पा रही है। मानदेय पंचायत प्रतिनिधियों का अधिकार है। डाॅ सिंह ने राज्य सरकार पर पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार में लगातार कटौती का आरोप लगाया है। मुखिया, प्रमुख सहित अन्य प्रतिनिधि आक्रोशित हैं। वार्ड सदस्य को विकासकार्य में न्यूनतम भागीदारी दी गई है।
पूर्व में नल-जल योजना के क्रियानव्यन में भी राज्प के अधिकांश पंचायत के वार्ड सदस्यों को देखरेख की जिम्मेदारी दी गई थी।लेकिन उन्हें अब बंचित कर दिया गया है।उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ग्राम पंचायत को मजबूत कर समग्र विकास चाहते थे। लेकिन वर्तमान केन्द्र और राज्य की सरकार इसे कमजोर कर सत्ता का केन्द्रीकरण चाहती है।यह ग्राम स्वराज की संकल्पना के विपरीत भी है। महात्मा गांधी ने कहा था बिना गांव के विकास के शहरों के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। विधान पार्षद ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रतिकूल बताया। मुख्यमंत्री के अतिरिक्त पंचायती राज मंत्री, मुख्य सचिव एवं पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी पत्र लिखकर लंबित मानदेय भुगतान का अनुरोध किया है।
(नि. सं.)
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
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August 23, 2026
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