12 अप्रैल 2018

सोच में परिवर्तन लाएँ, वास्तविक महिला सशक्तिकरण की ओर क़दम बढ़ाएँ: सोनी राज

आये दिन जब कोई रेप की घटना, छेड़खानी की घटना के बारे में सुनती हूँ, पढ़ती हूँ तो बहुत दुःख होता है। आख़िर हमारा समाज किस ओर जा रहा है? आज महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध बढ़ रहे हैं, शहर असुरक्षित होते जा रहे हैं.

कुछ चुनिंदा घटनाओं और चुनिंदा लोगों की वजह से कई सारी अन्य महिलाओं (लड़कियों) के बाहर निकलने के दरवाज़े बंद हो जाते हैं ।
                                          
लेकिन अब हमें बदलना होगा. लड़कियों को बचपन से सिखाया जाता है कि खाना बनाना ज़रूरी है, घर का काम सीखना ज़रूरी है। लेकिन अब परिदृश्य बदल रहा है। महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ रही है। असल परिवर्तन तो आना चाहिए आम लोगों के जीवन में। ज़रूरत है उनकी सोच में परिवर्तन लाने की, उन्हें बदलने की. आम महिलाओं के जीवन में परिवर्तन, उनकी स्थिति में उनकी सोच में परिवर्तन, यही तो है असली सामर्थ्य। ज़रूरत है बंद दरवाज़े को खोलने की, रौशनी को अंदर आने देने की और प्रकाश में अपना प्रतिबिम्ब देखने की, उसे सुधारने की, निहारने की और निखारने की. इसी कड़ी में एक दरवाज़ा है आत्मसुरक्षा (सेल्फ़ डिफ़ेन्स)  ज़रूरत है की हर महिला या लड़की को बताया जाए कि सेल्फ़ डिफ़ेन्स सीखना भी ज़रूरी है।

यह एक सोच है, ज़रूरत है इस सोच को आगे बढ़ाने की, ताकि विषम परिस्थिति आने पर वे अपनी सुरक्षा स्वयं कर सके।  ये महिलाओं के विकास को को गति देगा, दिशा देगा, आत्मविश्वास देगा। वे डरेगी नहीं, दबेगी नहीं । महिलाओं को भी जागरूक होना होगा, समझना होगा कि महिलायें कोमल हैं, कमज़ोर नहीं हैं । जागरूकता मतलब  रक्षा का पहला नियम. जब लोग सेल्फ़ डिफ़ेन्स अर्थात आत्म सुरक्षा सुनते हैं तो उनमें से अधिकांश के मन में  किक्स-पंच आते हैं. हालाँकि सही मायने में सेल्फ़ डिफ़ेन्स की शुरुआत किसी भी  शारीरिक सम्पर्क के बिना ही होता है। आत्मरक्षा का सबसे  महत्वपूर्ण  घटक जागरूकता होता है । जागरूकता अपने आप की, अपने परिवेश की और संभावित हमलावर की संभावना और रणनितियों  के बारे में अपराधियों  की प्राथमिक रणनीति सरप्राइज़ के रिएक्शन का फ़ायदा होता है। अपने आस पास हो रही चीज़ों के बारे में सचेत और जानकार रहें  तथा अपनी प्रबल उपस्थिति पेश कर सड़क पर होने वाली कई समस्याओं से बचा जा सकता है। महिलाओं को अपनी शक्ति को पहचानना होगा, समझना होगा कि हम कमज़ोर नहीं हैं, क्योंकि हम औरत हैं। महिलाओं को अपने अधिकार और ज़िम्मेदारी के प्रति जागरूक होना चाहिए, स्वस्थ समाज के लिए महिलाओं का शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से निरोग होना बहुत ज़रूरी है. मैं किसी को ग़लत नहीं कहना चाहती। महिलाओं को नुक़सान पहुँचने वाली सोच बुरी है। इस सोच के ख़िलाफ़ खड़े होने की ज़रूरत है।                            

जब मैंने कराटे सीखना शुरू किया था तो लोगों ने समाज ने काफ़ी विरोध जताया था. लोग हँसे थे क्योंकि उन्हें लगता था कि लड़कियाँ ये खेल नहीं खेल सकती हैं. लेकिन मैंने बिना कुछ सोचे इसे  चुनौती के रूप में लिया और लगातार खेल कर उन सब को ग़लत साबित किया और आज लगभग 1200 लड़कियों को  मैंने सेल्फ़ डिफ़ेन्स  सिखाया है। हालाँकि इसका श्रेय मैं अपने माता-पिता और ख़ास दोस्त को देती हूँ जिन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया।

मैं सभी से अनुरोध करना चाहती हूँ आप अपने बेटियों को एक मौका ज़रूर दें. लड़कियाँ जीवन के किसी भी दौर में सफलता हासिल कर सकती है। मैं लड़कियों से कहना चाहती हूँ आप सेल्फ़ डिफ़ेन्स ज़रूर सीखें. बात सिर्फ़ मार्शल आर्ट सीखने की नहीं है.  यह आत्मरक्षा के महत्व को बढ़ावा देने की कोशिश है। इससे कहीं ज़्यादा है यह लड़कियों के बीच आत्मविश्वास की भावना लाने के बारे में है कि वे अपनी सुरक्षा ख़ुद कर सकती हैं। उन्हें अपना हीरो ख़ुद बनने की ज़रूरत है. लड़कियों को मुश्किल घड़ी में पूरी बहादुरी से बर्बरता के खिलाफ लड़ना होगा. लड़कियों को किसी भी विषम परिस्थिति में घबराना नहीं चाहिए. उन्हें ग़लत इरादे से छूनेवाले से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उनका तुरंत प्रतिकार करना चाहिए.

महिलायें कही भी आ जा सकती है लेकिन कुछ गंदे लोगों की वजह से परेशानी होती है। इसलिए ज़रूरी है वे आत्मरक्षा के गुर सीखें. अब ज़रूरत है महिलायें अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ख़ुद ले और अपनी आत्मरक्षा के गुर सीखें क्योंकि यह समय हम सबके लिए अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ख़ुद लेने और इसके तरीक़े सीखने का है । घर हो या बाहर आपको सुरक्षित रखेगा आपका हुनर। ये एक सुरक्षित भविष्य की कामना है. अमल करें अभी करें।।
सोनी राज, मधेपुरा
(*सोनी राज मार्शल आर्ट की प्रशिक्षक हैं और राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार/ सम्मान पा चुकी हैं.)

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