28 अप्रैल 2017

अजूबा: एक प्रमाणपत्र पर दो हेडमास्टर, ये रूबी राय का बिहार है!

प्रमाण-पत्र एक और प्रधानाध्यापक दो. सुनने में तो असंभव प्रतीत होता है परन्तु माफ़ कीजिए, ऐसे उदाहरण को देख यही लगता है कि ये रूबी राय का बिहार है, यहाँ सबकुछ संभव है. मधेपुरा से जुड़ा ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है. 

इस बाबत प्रदीप कुमार  पिता स्व भैरो मंडल ग्राम तिनटेंगा थाना टीकापट्टी जिला पूर्णियां निवासी ने प्रखंड विकास पदाधिकारी आलमनगर (मधेपुरा) सह प्रखंड नियोजन ईकाई के सचिव मिन्हाज अहमद को आवेदन देकर अपने शैक्षणिक प्रमाण-पत्र द्वारा व्यक्ति फर्जी तरीके से नौकरी करने का आरोप लगाते हुए कानूनी कारवाई की मांग की है ।

आवेदक प्रदीप कुमार पिता भेरो मंडल ने बताया है कि पुर्णिया  जिले के रूपौली प्रखंड अन्तर्गत मध्य विद्यालय चपहरी में  प्रधानाध्यापक पर कार्यरत हैं. बताया कि मैं राजकीय प्राथमिक शिक्षा -प्रशिक्षण महाविद्यालय श्रीनगर पूर्णियां से वर्ष 1987-89 में प्रशिक्षण प्राप्त किया हूँ, जिसका शिक्षक प्रशिक्षण परीक्षा में रोल कोड 4201 रोल क्रमांक 37 एवं जन्मतिथि 09-06-1968 है । मुझे प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी आलमनगर के पत्रांक 15 दिनांक 27 मार्च 2014 को सत्तन राम पिता भुनेश्वर राम खुरहान मल आलमनगर द्वारा मांगी गई सूचना के आधार पर पता चला मेरे मैट्रिक एवं प्रशैक्षणिक प्रमाण-पत्र की फर्जी प्रति बनाकर प्रदीप कुमार पिता भरत सिंह बर्ष 2007 से मध्य विद्यालय खुरहान माल में प्रधानाध्यापक के पद पर नौकरी कर रहा है. आवेदन में दिये प्रमाण पत्र में हालाँकि प्रदीप कुमार पिता भेरो मंडल एवं सूचना से प्राप्त प्रदीप कुमार पिता भरत सिंह का मैट्रिक के प्रमाण पत्र में पिता का नाम अलग-अलग है, पर एक ही विद्यालय हाई स्कूल चकसिकन्दर से वर्ष 1986 में पास दोनों के मैट्रिक प्रमाण-पत्र में रोलकोड -5313 एवं रोल क्रमांक 0626 अंकित है. वहीं शिक्षा महाविद्यालय श्रीनगर पूर्णियां से शिक्षक प्रशिक्षण परीक्षा में उत्तीर्ण होने के प्रमाण-पत्र में भी पिता का नाम अलग-अलग है । परन्तु रोल कोड 4201 एवं रोल क्रमांक 37 एवं जन्म तिथि 09-06-68 दोनो प्रधानाध्यापक के प्रमाण-पत्र में एक ही है. जाहिर है दोनों प्रधानाध्यापक के प्रमाण-पत्र में वर्ष एवं रोल कोड, रोल क्रमांक, जन्मतिथि सहित विद्यालय एवं महाविद्यालय एक ही रहने से लोग सकते में हैं.

इस बाबत बीडीओ मिन्हाज अहमद ने दिये गये आवेदन के आलोक में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नीलम कुमारी के समक्ष अवलोकन करने के उपरान्त चार मई को दोनों प्रधानाध्यापक को पत्र निर्गत कर अपने सभी मूल प्रमाण पत्र के साथ बुलाया है.  वैसे क्षेत्र में यदि हो रहे चर्चाओं की बार करें तो प्रदीप कुमार पिता भरत मंडल के बारे में कहा जा रहा है कि प्रदीप कुमार का असली नाम पूर्व में विरेन्द्र कुमार था जो मतदाता पहचान पत्र में अंकित था परन्तु इधर अपना नाम भी मतदाता पहचान-पत्र में बदलकर प्रदीप कुमार कर लिया है.

अब देखना है कि दोनों में से कौन है असली और कौन नकली जेल की हवा खाने को होते हैं तैयार. क्योंकि एक ही रौल कोड, रौल नं., वर्ष, जन्मतिथि सहित विद्यालय एवं महाविद्यालय दो अलग-अलग लोगों के नहीं हो सकते.
(रिपोर्ट:प्रेरणा किरण)

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