21 नवंबर 2016

सक्सेस स्टोरी (1): पापिया गांगुली: सुर जब फिजां में गूंजते हैं तो श्रोता सुध-बुध खो बैठते हैं

वैसे तो ये बात तय है कि बिहार में किसी भी क्षेत्र में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और यहाँ की कई प्रतिभाओं ने कम साधन में भी देश में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया है.

कला के क्षेत्र में भी बिहार से अनगिनत ऐसे नाम हैं जिनकी प्रतिभा का लोहा समूचे देश ने माना है. संगीत एक ऐसा कठिन विषय है जिसमें महारथ हासिल करना सबके बूते की बात भी नहीं. पर संगीत के क्षेत्र में भी सूबे ने देश में अलग पहचान बनाई है.
    सक्सेस स्टोरी के इस भाग में हम आपके सामने ला रहे हैं बिहार की एक ऐसी ही प्रतिभा की कहानी जिसकी आवाज का जादू श्रोताओं के सर चढ़ कर बोलता है. पटना की पापिया गांगुली के सुर का जादू ऐसा कि जिसने
भी सुना, गानों में डूब सा गया और खूब सराहा. कुछ ने इस गायिका को बेहतरीन कहा तो बहुत से लोगों ने बिहार की इस बेटी की आवाज में लता की परछाईं देखी.  चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता, ऊटी समेत भारत के कई बड़े स्टेज पर अपने प्रदर्शन से पापिया ने सुर्खियाँ बटोरी तो अपनी क्षमता के बदौतल इस गायिका को मशहूर सिंगर उदित नारायण के साथ भी फिल्म में डुएट सॉंग बतौर पार्श्व गायिका गाने का मौका मिला.

संगीत ही जीवन है: 04 जून 1991 को पटना के एक बंगाली परिवार में जन्मी पापिया को संगीत से कब प्यार हो गया, उसे भी ठीक से याद नहीं. पापा आशीष गांगुली का सपना ही था कि बेटी संगीत में खूब नाम करे. कहें तो घर का माहौल ही संगीतमय था. फूफा आर. के. अरुण देश विख्यात म्यूजिक डायरेक्टर थे तो बुआ रत्ना अरूण की आवाज के चाहने वालों की संख्यां की सूबे सहित देश भर में कमी नहीं थी. उधर चाचा इन्द्रजीत गांगुली ने भी गजल गायकी में खासा नाम कमा रखा था.  मधेपुरा टाइम्स से लम्बी बातचीत में पापिया कहती हैं कि संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा तो उन्हें पापा आशीष गांगुली से ही मिली, परन्तु उसे अब भी याद है कि उसे पहला हारमोनियम चाचा ने ही खरीद कर दिया था.  पिता ने फिर पहले गुरु की भूमिका निभानी शुरू कर दी तो माँ संध्या गांगुली ने भी बेटी में बड़ी गायिका की छवि देखकर जमकर सपोर्ट किया.
    संस्कार को सबसे बड़ा धन मानने वाली पापिया को फिर जब संगीत गुरु डॉ. मीरा चौधरी और डॉक्टर रवि दा का साथ मिला तो संगीत की तकनीकि गहराइयों से वह वाकिफ होने लगी. रियाज और आत्मविश्वास जब संबल बना तो फिर पापिया के संगीत का जादू लोगों पर छाने लगा. अपने कॉन्वेंट में स्कूली पढ़ाई के समय को याद कर बताती है कि स्कूल के एक प्रोग्राम में जब उसने लता जी के गाने ‘ए मेरे वतन के लोगों’ की प्रस्तुति दी थी तो प्रिंसिपल की आँखों से आंसू छलक पड़े थे. इस गाने पर कॉन्वेंट की सारी ‘सिस्टर्स’ वहां सुनने पहुँच गई थी, जो अक्सर किसी प्रोग्राम में बैठकर नहीं सुना करती थी.  पापिया ने इंटर, पटना यूनिवर्सिटी से संगीत में ग्रैजुएशन, संगीत में ही मास्टर डिग्री के अलावे प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से प्रभाकर की डिग्री हासिल की है.

उपलब्धियों और सम्मानों ने बढ़ाया हौसला: विभिन्न मंचों पर गाने के मिलते अवसर ने पापिया को संगीत के चाहनेवालों के बीच लोकप्रिय बनाना शुरू किया तो फिर सम्मानों और पुरस्कारों की झड़ी लगनी शुरू हो गई. वर्ष 2015 में मिले बिहार कला रत्न सम्मान, कला सम्मान, 2016 में शाहिब कला सम्मान मिला तो लगा कि शायद अब संगीत के ऊँचे मुकाम पर जाने का सिलसिला शुरू हुआ है. सिनेयात्रा सम्मान के दौरान रविन्द्र भवन, पटना के बड़े मंच पर लीजेंड सिंगर उदित नारायण, शारदा सिन्हा, दीपा नारायण, विनय बिहारी आदि के सामने जब गाने का मौका मिला और उनलोगों के द्वारा खूब सराही गई तो पापिया गांगुली का नाम सूबे में संगीत के क्षेत्र में चर्चित चेहरा बन गया. ऑल इंडिया रेडियो, दूरदर्शन के साथ राजगीर महोत्सव, कोशी महोत्सव, सोनपुर मेला, राष्ट्रीय खादी सरस महोत्सव, पटना और दिल्ली में आयोजित बिहार दिवस, वैशाली महोत्सव, इंटरनेशनल मंदार महोत्सव, भागलपुर महोत्सव, सारस मेला, शिल्पोत्सव, अनूप जलोटा के साथ भरोअल छठ महोत्सव, भारतीय इंटरनेशनल व्यापार मेला, रक्षा बंधन महोत्सव, महनार महोत्सव, अहिल्या गौतम महोत्सव, होली मिलन समारोह, पूर्वांचल क्षेत्रीय कृषि मेला, श्री उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव में मनमोहक प्रस्तुति समेत विभिन्न अखबारों और टेलीविजन चैनल की सुर्ख़ियों के बाद उनकी गायकी को पसंद करने वालों की संख्यां अनगिनत हो गई. (क्रमश:)
पापिया गांगुली के गाए गीत 'मैं तो बची राम जी कृपा से' सुनें, यहाँ क्लिक करें.  (रिपोर्ट: आर.के. सिंह)
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