मनाई गई कमलेश्वरी प्रसाद यादव की 124वीं जयंती, संविधान सभा सदस्य ने कोसी क्षेत्र में उच्च शिक्षा की ज्योत जलाई
इस अवसर पर महाविद्यालय पहुंचे अतिथियों, शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने स्वर्गीय कमलेश्वरी प्रसाद यादव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। जयंती समारोह का उद्घाटन बीएन मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. अनंत प्रसाद यादव, डॉ. आरकेपी रमण, प्रो. डॉ. वीणा कुमारी, पूर्व प्रो. शब्बीर अहमद एवं प्रधानाचार्य डॉ. अशोक कुमार झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य डॉ. अशोक कुमार झा ने कहा कि स्वर्गीय कमलेश्वरी प्रसाद यादव जैसे व्यक्तित्व समाज में विरले ही होते हैं। उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझते हुए पिछड़े कोसी क्षेत्र में उच्च शिक्षा की अलख जगाई और केपी महाविद्यालय की स्थापना कर समाज को नई दिशा दी। वे संविधान सभा के सदस्य के रूप में भी देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके थे।
पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. अनंत प्रसाद यादव, डॉ. आरकेपी रमण सहित अन्य अतिथियों ने कमलेश्वरी बाबू के सामाजिक उत्थान और शिक्षा के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को उनकी पहचान बताया। वक्ताओं ने कहा कि उनके विचार, कृतित्व और योगदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।

इस अवसर पर मंच से ‘कौशिक चिंतन’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसमें स्वर्गीय कमलेश्वरी प्रसाद यादव के जीवन, विचारों एवं सामाजिक योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। पूर्व कुलपति प्रोफेसर डॉ. अनंत कुमार ने कहा कि 30 जुलाई 1965 को मात्र छह शिक्षकों के बल पर उन्होंने के.पी. महाविद्यालय की स्थापना की थी। इतिहास में प्रो. नागेंद्र प्रसाद यादव, राजनीति विज्ञान में प्रो. चितानंद यादव, अर्थशास्त्र में प्रो. त्रिवेणी प्रसाद साह, मैथिली में प्रो. बालखण्डी झा, दर्शनशास्त्र में प्रो. श्याम नारायण यादव तथा अंग्रेजी में प्रो. डी. एन. राम जैसे शिक्षकों ने प्रारंभिक दौर में महाविद्यालय को दिशा दी।
उन्होंने बताया कि कमलेश्वरी बाबू स्वयं जमींदार परिवार से थे, फिर भी उन्होंने क्षेत्र के बड़े-बड़े जमींदारों से जमीन दान लेकर महाविद्यालय का निर्माण कराया, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी शिक्षित होकर आगे बढ़ सकें और इस क्षेत्र से अशिक्षा दूर हो।
जिस समय की शिक्षा का इतना प्रचार प्रसार नहीं था उस समय कमलेश्वरी बाबू ने कोसी क्षेत्र के बड़े-बड़े यादव जमींदारों से शिक्षा के लिए जमीन दान मांगा। लोगों में शिक्षा की ज्योति जलाने वाले कमलेश्वरी प्रसाद यादव ने इस क्षेत्र में केपी महाविद्यालय की स्थापना की थी।
कौन थे कमलेश्वरी बाबू
कमलेश्वरी प्रसाद यादव मूलतः मधेपुरा जिले के चतरा निवासी थे, कमलेश्वरी बाबू चतरा (मधेपुरा) के जमींदार बाबू राम लाल मंडल के पुत्र थे। जिनका परिवार मधेपुरा के प्रतिष्ठित परिवारों में था। कमलेश्वरी बाबू पटना विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र और बीएचयू से हिंदी में डबल एमए किए थे। वे पटना विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री भी प्राप्त किए थे।
बाबू कमलेश्वरी प्रसाद यादव संविधान सभा के लिए खगड़िया क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। 1952 के बिहार विधान सभा चुनाव में कमलेश्वरी बाबू उदा-किशनगंज क्षेत्र से विधायक बने और क्षेत्र के समस्याओं को पूरी जिम्मेदारी के साथ उठाये। इस समय 1952 में मधेपुरा के विधायक मुरहो स्टेट के यादव शिरोमणि राजा रासबिहारी लाल मंडल के सबसे छोटे सुपुत्र बाबू बीपी मंडल थे। कमलेश्वरी बाबू फिर 1972 में भी निर्वाचित हुए।
पहले ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और अब बीएन मंडल विश्वविद्यालय में कमलेश्वरी प्रसाद कॉलेज आज भी शिक्षा से उनकी स्मृति के जुड़ाव को दर्शाता है। 1902 के लगभग में जन्म लिए बाबू कमलेश्वरी प्रसाद मंडल की मृत्यु 15 नवम्बर, 1989 को हुई।
कार्यक्रम में कमलेश्वरी प्रसाद यादव के पौत्र आनंद कुमार, पौत्री डॉ. आशा यादव, बीएनएमयू के डीएसडब्ल्यू डॉ. अशोक कुमार, बीएनएमवी के प्राचार्य डॉ. संजीव कुमार, एचएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जवाहर पासवान, इंग्लिश एचओडी राजीव कुमार मल्लिक, महाविद्यालय के एनसीसी कैडेट, शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
January 04, 2026
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