कार्यक्रम की शुरुआत माँ दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पूजा-अर्चना से हुई। इस दौरान बच्चों को माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की जानकारी दी गई तथा उनके महत्व और पौराणिक संदर्भों पर प्रकाश डाला गया। इसके पश्चात पूरे भक्ति भाव के साथ दुर्गा माँ की आरती संपन्न हुई, जिसमें सभी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने भाग लिया। पूजा के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यालय के बच्चों ने नृत्य-नाटिका की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रावण दहन रहा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ या बुराइयाँ क्यों न आएँ, अंततः अच्छाई की ही विजय होती है।
विद्यालय प्रचार्या नंदिनी बरनवाल ने अपने संबोधन में बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश दिया तथा ऐसे आयोजनों से प्राप्त नैतिक शिक्षा को जीवन में उतारने पर बल दिया।
प्राचार्या नंदिनी बरनवाल ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा, – “ऐसे कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों को हमारी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों और सही जीवन दृष्टिकोण को भी विकसित करते हैं। दुर्गा पूजा जैसे पर्व हमें यह सिखाते हैं कि हमें सदैव साहस, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।”
पूरे आयोजन में विद्यालय परिवार ने एकजुट होकर अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। यह कार्यक्रम बच्चों के लिए धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम साबित हुआ।
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
September 28, 2025
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