01 अप्रैल 2018

मुरलीगंज प्रखंड मे चेचक ने पसारा पाँव, दर्जनों बच्चे आक्रांत

मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड के गंगापुर पंचायत वार्ड नंबर 1 खुशरूपट्टी मुसहरी गाँव में चेचक से दर्जनों बच्चे आक्रांत हैं ।

खुसरूपट्टी के ग्रामीणों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से दर्जनों बच्चे चेचक से आक्रान्त हैं लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कोई मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई है.

बताया कि कई उम्र दराज महिलाएं एवं बच्चे और बूढ़े भी इससे आक्रांत हैं. चेचक के भयंकर प्रकोप से कई परिवार के दर्जनों लोग व बच्चे गंभीर रूप से पीड़ित हैं। चिकेन पॉक्स के बढ़े प्रकोप से पिछले एक सप्ताह से सरदर्द, बुखार और जलन जैसी शारीरिक पीड़ा से लोग कराह रहे हैं और लगभग पांच दर्जन बच्चे से अधिक अब भी आक्रांत है। इनमें ज्यादातर बच्चे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक चेचक से पीड़ित गांव में मेडिकल टीम नहीं पहुंच पाई है। पीड़ित परिवार किसी प्रकार से इलाज कराते है। वहीँ पड़ोस के गांव भलनी के समाज सेवी अप्पु कुमार एवं पवन कुमार तथा प्रभाष यादव ने पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर हरसंभव सहायता पहुंचाने का आश्वासन दिया एवं मामले की जानकारी चिकित्सा पदाधिकारियों को भी भेजी गई.

आक्रांत बच्चे : ग्रामीणों ने बताया कि शिवानी कुमारी, उम्र चार वर्ष, सोनू कुमार उम्र 17 वर्ष, सौरभ कुमार उम्र 5 वर्ष, कार्तिक कुमार, उम्र 4 वर्ष, अमर कुमार, उम्र 6 वर्ष,आशीष कुमार, उम्र 2 वर्ष, प्रफुल्ल देवी, उम्र 27 वर्ष, काजल कुमारी, उम्र 17 वर्ष, मनिया देवी, उम्र 25 वर्ष, प्रियंका कुमारी उम्र 6 वर्ष, धीरेंद्र कुमार, 3 वर्ष, रसिका कुमारी, उम्र 2 वर्ष, जितेंद्र कुमार उम्र 4 वर्ष, गौरी कुमारी, उम्र 2 वर्ष, गीता कुमारी, उम्र 9 वर्ष, सपना कुमारी, उम्र 7 वर्ष सभी चिकन पॉक्स से पीड़ित हैं.

ग्रामीण लोगों की मान्यता : ग्रामीण क्षेत्र के लोग चेचक के शुरूआती दौर में जानकारी नहीं दे पाते हैं । यहां के लोगों में चेचक को धार्मिक मान्यता से जोड़ते हैं। पांच से सात दिनों तक बिना हल्दी व लहसुन, प्याज का खाना बनता है। और घरेलू इलाज किया जाता है। जिस कारण चेचक बढ़कर अन्य बीमारी का रूप ले लेता है। 

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरलीगंज चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर संजीव कुमार ने कहा कि यदि इस तरह की समस्या वहां फैल रही थी, आशा कार्यकर्ता ने मुझे इसकी सूचना अब तक नहीं दी है. मैं आज रविवार होने के बावजूद कोशिश करता हूँ कि मेडिकल टीम भेजकर भेजकर पीड़ितों के बीच आवश्यक दवाइयां भेज सकूँ. आज ओपीडी में आवश्यक सेवा ही चल रही है.

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