03 अक्तूबर 2016

‘इसमें कहीं खामी नहीं है कि आपको तालियों के सपने आते हैं: राजशेखर

राजशेखर. मधेपुरा के एक गाँव से मायानगरी मुंबई तक सफ़र और सफलता दर सफलताएँ जिनकी झोली में गिरती ही जा रही है.
फिल्म तनु वेड्स मनु से जब गीतकार का सफ़र शुरू हुआ तो अचानक ही इस बेहद सुलझे और आकर्षक छवि वाले शख्स के न सिर्फ मधेपुरा या कोसी बल्कि सूबे और देश भर में प्रशंसकों की भरमार हो गई. फिर तनु वेड्स मनु रिटर्न्स के बाद पिछले बिहार विधान सभा के चुनाव में भी इनकी चर्चा खूब हुई. बिहार में बहार हो, नीतीशे कुमार हो इनके द्वारा ही लिखी गई थी जिसे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत उनके प्रशंसकों ने जम कर सराहा था.
     वैसे तो मधेपुरा टाइम्स से राजशेखर का पुराना नाता है, पर इस बार जब राजशेखर का उनके अपने गाँव भेलवा आना हुआ तो कई घंटे उनके हमारे स्टूडियो में भी बीते. वे कहते हैं कि सोशल मीडिया पर मधेपुरा टाइम्स का मोनोपोली जैसा है. मधेपुरा टाइम्स के द्वारा लिया गया एक छोटा सा इंटरव्यू हम आपके सामने रख रहे हैं और आशा करते हैं कि गीत-संगीत के क्षेत्र में सफलता की चाहत रखने वालों के लिए ये साक्षात्कार उपयोगी होगा.

मधेपुरा टाइम्स: फिल्म तनु वेड्स मनु से शुरुआत कर बिहार में बहार हो, नीतीशे कुमार हो जैसे गीत लिखने के बाद राज्य और देश भर में आपकी लोकप्रियता काफी बढ़ी है. अब आगे आप अपने प्रशंसकों को क्या देने जा रहे हैं?
राजशेखर: पिछले साल तनु वेड्स मनु रिटर्न्स आई थी और इस साल दिसंबर तक में निम्मो नाम की फिल्म रिलीज होगी. ये स्माल फिल्म विद बिग हार्ट है. इस फिल्म का पूरा अरेंजमेंट यूरोप में हुआ है. हालाँकि अन्य व्यस्तता के कारण मैं वहां जा नहीं सका, जिसका अफ़सोस है. इसके अलावे अगले साल पांच-छ:  और फ़िल्में आयेगी जिनमें मेरे गीत होंगे. अगले साल तक मेरे 20-25 गाने आने चाहिए. कुछ देश के सबसे बड़े बैनरों के साथ और कुछ ऐसे एक्टर्स और डायरेक्टर्स के साथ, जिनके साथ आपको काम करने की हमेशा इच्छा रहती है. कुछ छोटी और कुछ बहुत बड़ी फ़िल्में भी आ रही है.
         इसके अलावे इधर एक नया काम शुरू कियाहूँ, मजनू का टीला. मजनू का टीला में कुछ कवितायें, कुछ शॉर्ट स्टोरीज, कुछ बतकही है. अभी इसकी  प्रस्तुति बैंगलोर, भोपाल, आईआईटी दिल्ली में हो चुकी है और सोशल मिडिया समेत ऑडिएंस के प्यार और रिस्पांस उत्साहवर्धक हैं. ये दरअसल डायरी के उन पिछले पन्नों जैसा है जिनपर भी आप कुछ लिखते हैं. उन सारे चीजों को मैंने जमा किया है जो फिल्मों में छूट जाते हैं. हिन्दी दिवस पर प्यार और रेस्पोंस ऐसे लोगों से मिला है जिनके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था. बहुत से शब्द मैंने गावों के लिए हैं. मेरे मित्र स्वरुप के साथ लाइव म्यूजिक के साथ इसका शो करते हैं और काफी लोकप्रिय हो रहा है. मुझे समझने को मिल रहा है कि यूथ क्या चाह रहे हैं.  और इन सबके अलावे बच्चों के लिए कहानियां, कवितायेँ और हायकू भी लिख रहा हूँ. अब पहेलियाँ भी लिखने को मन बना रहा हूँ. आपके अन्दर का बच्चा बचा रहे इसके लिए मैं बच्चों की कई किताबें भी सबस्क्राइब करता हूँ.

 मधेपुरा टाइम्स: कोसी के लड़के-लड़कियों में  बॉलीवुड के प्रति बहुत ही आकर्षण है. कितना सुरक्षित है उनके लिए बॉलीवुड और कैसे वे गीत, संगीत और अभिनय के क्षेत्र में सफल हो सकें, आपकी क्या सलाह है?
राजशेखर: यदि वे चाहें कि रातोंरात स्टार बन जाए तो वो हजारों में से एक ही होगा. आपको मेहनत करनी पड़ेगी. आपके दिमाग में हमेशा वो ही बातें बातें रहनी चाहिए, जिनपर आप काम कर रहे हैं. खूब संघर्ष की आवश्यकता है. आपको यदि पूरी की पूरी जिम्मेदारी दे दी जाती है तो आपको ही हर कुछ देखना पड़ता है.  जिमेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि फायनली आप ही जज हैं.
               कला के प्रति समर्पण के अलावे हर के मन में चाहत होती है कि आसपास के लोग आपको प्यार करें. इसमें कहीं खामी नहीं नहीं है कि आपको तालियों के सपने आते हैं. लोकप्रिय होना चाहते हैं होना चाहिए. पर सफलता और लोकप्रियता के लिए कोई शौर्टकट नहीं है. मुझे भले ही पहली फिल्म मिलने में परेशानी नहीं हुई. पर उसके बाद एक कॉन्स्टेन्ट स्ट्रगल मेरे साथ है. ये बात महत्वपूर्ण है कि आप किन चीजों को ना कह रहे हैं और जिन चीजों को ना कह रहे हैं तो आपके ना में ताकत होनी चाहिए. अपने आप को अपडेटेड रखने का स्ट्रगल है.  जहाँ तक संघर्ष की बात है तो सबकी जिन्दगी में स्ट्रगल है और मेरे जिन्दगी में भी है. इस इलाके के सभी लड़के-लड़कियां स्ट्रगल कर रहे हैं. पढने वालों को या किसान के साथ भी संघर्ष है. एक राइटर आपमें जिन्दा रहे इस बात का स्ट्रगल है. अपने आप को निखारें और फोकस्ड रहें. शुरूआती पढ़ाई जरूरी है.
            अपनी लेखनी में बहुत से शब्द मैं इस इलाके से ले गया हूँ. मुझे इस बात की कोई शर्म नहीं है कि मैं मधेपुरा से हूँ और न हीं कोई घमंड. कोई कहीं भी पैदा हो सकता है. अपने संस्कार अपने साथ ले जाने की जरूरत है. खूब प्यार करें, मुहब्बत करें किसी भी चीज से. आपको एक गौरैया से भी प्यार हो सकता है और एक पौधे से भी. संवेदना जगनी बहुत ही जरूरी है. एक पेड़ भी आपसे बात कर सकता है. संवेदना बचाएं रखें अपने अन्दर. सभी सुर बेहतर रहने के बाद भी यदि आप दिल से नहीं गाते हैं तो दिल को छू नहीं पाते हैं. आर्टिस्ट तब ही बड़ा होगा जब उसका दिल बड़ा होगा.

मधेपुरा टाइम्स: दिल बड़ा होने की बात पर ये बता दीजिये कि आप शादी कब करेंगे?
राजशेखर:  करेंगे, पर अभी बहुत सारी फ़िल्में सामने आ रही है उसमे बहुत सा समय देना पड़ रहा है.  मुंबई जैसा एक अपरिचित शहर अब अपना हो गया है. मैं नहीं मानता कि शादी आपकी प्रगति में बाधक है पर अभी काम पर ज्यादा फोकस्ड हूँ.
राजशेखर के साथ पूरा इंटरव्यू सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें.

(रिपोर्ट: आर. के. सिंह, कैमरा: मुरारी सिंह)

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