मधेपुरा नगर परिषद् के कुल 26 वार्ड पार्षदों को 9 जून को अपना नेता यानी मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद को चुनना है।
इसके लिए जहां संभावित प्रत्याशियों ने एड़ी-चोटी का पसीना बहाना शुरू कर दिया है वहीं अपनी सभी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए अधिकांश पार्षद भी कम परेशान नहीं है।
मुख्य पार्षद कौन बनेगा ? यह सवाल अभी हर किसी के जेहन में हैं। निवर्तमान मुख्य पार्षद विशाल कुमार बबलू इस बार पार्षद नहीं चुने जा सके। लेकिन उनकी धर्मपत्नी सुधा देवी पार्षद चुनी गई और उन्हें मुख्य पार्षद पद का एक सबल प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा है। इन्हें चुनौती देने के लिए नगर पंचायत की अध्यक्ष रही निर्मला देवी एक सशक्त दावेदार बनकर सामने आई है। तीसरे मोर्चे के रूप में भी आठ पर्षदो ने एक फ्रंट स्थापित कर लिया है।
शपथ ग्रहण और मुख्य पार्षद चुनाव की तिथि नजदीक आने के साथ ही फाइनल बुकिंग का काम भी तेज़ हो चुका है। लेकिन अभी पार्षदो का स्वर्ण काल है।आज हाथ आते हैं तो कल फिसल जाए हैं। लिहाजा मुख्य पार्षद की कुर्सी अभी हॉट चेयर बन चुकी है जिस पर बैठने के लिए साम, दाम ,दंड और भेद के सारे तीर तरकश से निकाले जा रहे हैं।
स्वाभाविक है कि जब यह कुर्सी इतनी महत्वपूर्ण हो चुकी है तो चौंका गजट भी परवान चढ़ी हुई है। अब यह भी कहा जा रहा है कि इस स्थिति से निपटने के लिए अब सांसद और विधायक भी अपनी अपनी रुचि के प्रत्याशियों के लिए अपनी अभिरुचि प्रदर्शित करने लगे है।
लेकिन यहां की इस पॉलिटिक्स के जानकार यही कहते हैं कि हॉर्स ट्रेडिंग ही चलेगी और जिसकी जितनी बड़ी झोली, वही बनेगा विजेता। लेकिन जिला प्रशासन इस मुद्दे पर अनजान बना बैठा है। जिलाधिकारी इस बावत पूछे जाने पर कहते हैं कि हॉर्स ट्रेडिंग की उन्हें कोई जानकारी अब तक नहीं है। ज्योंही कोई शिकायत मिलेगी फौरन कारवाई होगी।
यूं इस बावत अपने कक्का जी की बात भी गौरतलब है कि सरकार ही चाहती है कि यह सब चलता रहे और नगर निकाय का कभी भला नहीं हो। जब ग्राम पंचायत में मुखिया का चुनाव सीधे आम मतदाता द्वारा होती है और अन्य राज्यो में भी मुख्य पार्षद का चुनाव आम मतदाता ही करती है तो फिर अपने राज्य में पार्षदों का मत पाने के लिए मुख्य पार्षद को क्यों शोषित होकर शोषण करने के लिए छोड़ दिया जाता है?
मुख्य पार्षद कौन बनेगा ? यह सवाल अभी हर किसी के जेहन में हैं। निवर्तमान मुख्य पार्षद विशाल कुमार बबलू इस बार पार्षद नहीं चुने जा सके। लेकिन उनकी धर्मपत्नी सुधा देवी पार्षद चुनी गई और उन्हें मुख्य पार्षद पद का एक सबल प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा है। इन्हें चुनौती देने के लिए नगर पंचायत की अध्यक्ष रही निर्मला देवी एक सशक्त दावेदार बनकर सामने आई है। तीसरे मोर्चे के रूप में भी आठ पर्षदो ने एक फ्रंट स्थापित कर लिया है।
शपथ ग्रहण और मुख्य पार्षद चुनाव की तिथि नजदीक आने के साथ ही फाइनल बुकिंग का काम भी तेज़ हो चुका है। लेकिन अभी पार्षदो का स्वर्ण काल है।आज हाथ आते हैं तो कल फिसल जाए हैं। लिहाजा मुख्य पार्षद की कुर्सी अभी हॉट चेयर बन चुकी है जिस पर बैठने के लिए साम, दाम ,दंड और भेद के सारे तीर तरकश से निकाले जा रहे हैं।
स्वाभाविक है कि जब यह कुर्सी इतनी महत्वपूर्ण हो चुकी है तो चौंका गजट भी परवान चढ़ी हुई है। अब यह भी कहा जा रहा है कि इस स्थिति से निपटने के लिए अब सांसद और विधायक भी अपनी अपनी रुचि के प्रत्याशियों के लिए अपनी अभिरुचि प्रदर्शित करने लगे है।
लेकिन यहां की इस पॉलिटिक्स के जानकार यही कहते हैं कि हॉर्स ट्रेडिंग ही चलेगी और जिसकी जितनी बड़ी झोली, वही बनेगा विजेता। लेकिन जिला प्रशासन इस मुद्दे पर अनजान बना बैठा है। जिलाधिकारी इस बावत पूछे जाने पर कहते हैं कि हॉर्स ट्रेडिंग की उन्हें कोई जानकारी अब तक नहीं है। ज्योंही कोई शिकायत मिलेगी फौरन कारवाई होगी।
यूं इस बावत अपने कक्का जी की बात भी गौरतलब है कि सरकार ही चाहती है कि यह सब चलता रहे और नगर निकाय का कभी भला नहीं हो। जब ग्राम पंचायत में मुखिया का चुनाव सीधे आम मतदाता द्वारा होती है और अन्य राज्यो में भी मुख्य पार्षद का चुनाव आम मतदाता ही करती है तो फिर अपने राज्य में पार्षदों का मत पाने के लिए मुख्य पार्षद को क्यों शोषित होकर शोषण करने के लिए छोड़ दिया जाता है?
कौन बनेगा नगर परिषद् का मुख्य पार्षद ? हॉर्स ट्रेडिंग परवान पर
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
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May 30, 2017
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